वंदे मातरम पर शशि थरूर की टिप्पणी से छिड़ी बहस, बीजेपी ने साधा निशाना

The Red Ink
राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor के एक बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। थरूर ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छंदों को शुरुआत और समापन दोनों अवसरों पर गाने की अनिवार्यता को गैर-जरूरी बताया, जिसके बाद बीजेपी ने उन पर तीखा हमला बोला है।

थरूर बोले- हर कार्यक्रम में पूरा राष्ट्रगीत दो बार गाना जरूरी नहीं
तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन छोटे सरकारी आयोजनों में पूरे वंदे मातरम को बार-बार गाना दर्शकों पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है। उनका कहना था कि औपचारिक और उच्चस्तरीय सरकारी कार्यक्रमों में इसे एक बार प्रस्तुत किया जाना समझ में आता है, लेकिन हर आयोजन में शुरुआत और अंत दोनों समय पूरा गीत गाना व्यावहारिक नहीं लगता। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले कई कार्यक्रमों में शुरुआत वंदे मातरम से होती थी और समापन राष्ट्रगान से किया जाता था। थरूर के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में इसे हर कार्यक्रम पर लागू करना आवश्यकता से अधिक जोर देने जैसा प्रतीत होता है।

राष्ट्रगीत पर कोई आपत्ति नहीं, सिर्फ व्यवस्था पर सवाल
कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया कि उन्हें वंदे मातरम या उसके सम्मान से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं राष्ट्रगीत का सम्मान करते हैं और इसे गाने में कोई संकोच नहीं है। उनका तर्क केवल इतना है कि इसकी प्रस्तुति को लेकर संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

बीजेपी का पलटवार, देशभक्ति पर उठाए सवाल
थरूर की टिप्पणी पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्रगीत जैसे संवेदनशील विषयों पर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है। बीजेपी का कहना है कि वंदे मातरम देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है और इस पर सवाल उठाना जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि राष्ट्रगीत को लेकर किसी भी प्रकार की आपत्ति या बहस देशभक्ति की भावना को कमजोर करने का प्रयास माना जाएगा।

केरल में पहले से चल रहा है विवाद
यह विवाद उस समय और गहरा गया जब केरल में वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण को लेकर राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच अलग-अलग राय सामने आई। इसी संदर्भ में थरूर ने कहा कि इस मुद्दे का समाधान टकराव के बजाय सहमति और संवाद से निकलना चाहिए।

क्या कहते हैं नियम?
गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार वंदे मातरम के आधिकारिक संस्करण की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है। सरकारी और औपचारिक कार्यक्रमों में इसके गायन को लेकर अलग-अलग स्तर पर निर्देश लागू किए जाते रहे हैं। हालांकि इस विषय पर व्याख्या और व्यवहारिक अनुपालन को लेकर समय-समय पर बहस भी होती रही है।

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