रूस में तेल का संकट: दुनिया को ईंधन बेचने वाला देश खुद पेट्रोल के लिए बेहाल, पंपों पर लंबी कतारें; भारत से आयात शुरू

The Red Ink
दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल रूस इन दिनों ऐसे ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है, जिसकी कुछ साल पहले तक शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। हालात यह हैं कि कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर घंटों लंबी कतारें लग रही हैं, ईंधन की राशनिंग शुरू हो चुकी है और लोगों को पेट्रोल मिलने की कोई निश्चित गारंटी नहीं है। यूक्रेन के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों से रूस की तेल रिफाइनरियों और ईंधन आपूर्ति व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसका असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है।

पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, लोगों में बढ़ रही बेचैनी
रूस के कई इलाकों से सामने आ रही तस्वीरें और वीडियो बता रहे हैं कि पेट्रोल भरवाने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो चुका है, जबकि जहां उपलब्ध है वहां वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग खाली पंपों, बढ़ती कीमतों और अव्यवस्था को लेकर सरकार पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। साइबेरिया के इरकुत्स्क शहर में तो हालात ऐसे हो गए कि मेयर को कतार में खड़े लोगों के लिए पोर्टेबल टॉयलेट तक लगवाने पड़े।

पुतिन ने भी माना, अब भी बनी हुई है समस्या
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वीकार किया है कि ईंधन संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, मोटर चालकों और कारोबारियों दोनों को अभी भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियां कीमतों को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रही हैं, हालांकि निजी पेट्रोल पंपों पर कीमतों में अंतर देखा जा रहा है।

यूक्रेन के हमलों ने बिगाड़ा पूरा समीकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि संकट की सबसे बड़ी वजह यूक्रेन की ओर से रूस के ऊर्जा ढांचे पर लगातार किए जा रहे हमले हैं। पिछले कुछ महीनों में ड्रोन और मिसाइल हमलों ने कई प्रमुख तेल रिफाइनरियों, ईंधन डिपो और सप्लाई नेटवर्क को नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्टों के अनुसार, जून के अंत तक रूस की लगभग 28 प्रतिशत रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हो चुकी थी। इससे ईंधन उत्पादन और वितरण दोनों पर भारी दबाव आ गया।

किसानों से लेकर आम नागरिक तक प्रभावित
ईंधन संकट का असर केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं है। रूस के कृषि क्षेत्रों में किसान भी परेशान हैं क्योंकि डीजल और पेट्रोल की कमी के कारण फसल कटाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। वहीं कई इलाकों में लोग सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा कर रहे हैं कि किस पेट्रोल पंप पर ईंधन उपलब्ध है और कहां कतार अपेक्षाकृत छोटी है। कुछ जगहों पर पेट्रोल भरवाने को लेकर लोगों के बीच झड़पों की घटनाएं भी सामने आई हैं।

भारत से पेट्रोल मंगाने लगा रूस
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि रूस को अब विदेशों से पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने भारत से समुद्री मार्ग के जरिए पेट्रोल मंगाना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि भारत से कम से कम 60 हजार मीट्रिक टन पेट्रोल रूस के लिए भेजा जा चुका है। इसके अलावा 30 से 40 हजार टन क्षमता वाले दो और टैंकर रवाना किए गए हैं। जानकारी यह भी है कि रूस हर महीने करीब चार लाख टन पेट्रोल विभिन्न देशों से आयात करने की योजना बना रहा है। इस अभियान में बेलारूस भी रूस की मदद कर रहा है और उसने हाल के महीनों में रेल मार्ग से पेट्रोल की आपूर्ति कई गुना बढ़ा दी है।

दुनिया को तेल बेचने वाला देश आयात पर क्यों मजबूर हुआ?
रूस सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के प्रमुख पेट्रोलियम निर्यातकों में गिना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात अलग हैं। यूक्रेन के हमलों ने उत्पादन क्षमता कम कर दी है, जबकि देश के भीतर गर्मियों के मौसम में ईंधन की मांग भी काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस को पहली बार बड़े पैमाने पर दूसरे देशों से पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बड़े रिफाइनिंग हब ही फिलहाल इस कमी को कुछ हद तक पूरा कर सकते हैं।

डीजल निर्यात पर भी लग सकती है रोक
रूस पहले ही पेट्रोल और एविएशन फ्यूल के निर्यात पर रोक लगा चुका है। अब राष्ट्रपति पुतिन ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर डीजल के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है, ताकि घरेलू बाजार में आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

कब तक सामान्य होंगे हालात?
विश्लेषकों का कहना है कि रूस में ईंधन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि सबसे बड़ी चुनौती उसकी सप्लाई चेन है। जहां ईंधन की जरूरत है, वहां समय पर पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। मॉस्को की सबसे बड़ी रिफाइनरी, जो राजधानी और आसपास के क्षेत्र की लगभग 40 प्रतिशत ईंधन जरूरत पूरी करती थी, गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। रिपोर्टों के अनुसार उसकी मरम्मत में कम से कम तीन महीने लग सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सप्ताह तक रूस के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की किल्लत बनी रह सकती है।

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