रूस का बड़ा बयान: भारत को तेल की कोई कमी नहीं होगी, क्या जारी रहेगी सस्ती रूसी सप्लाई?

The Red Ink
वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट की आशंकाओं के बीच रूस ने भारत को बड़ा भरोसा दिया है। रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने कहा है कि भारत को तेल आपूर्ति में किसी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की है।

रूस का भरोसा—भारत के हित सुरक्षित रहेंगे
दिल्ली में होने वाली BRICS Foreign Ministers Meeting 2026 से पहले दिए इंटरव्यू में लावरोव ने साफ कहा कि भारत-रूस ऊर्जा संबंध मजबूत हैं और भविष्य में भी बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अंतरराष्ट्रीय ताकतें दोनों देशों के रिश्तों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिलेगी।

पीएम मोदी की अपील के बाद बढ़ी थी चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईरान क्षेत्र में जारी तनाव का हवाला देते हुए पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल और सोने की खपत कम करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, इसलिए नागरिकों को जिम्मेदारी से खपत करनी चाहिए।

भारत की तेल निर्भरता और रूस की भूमिका
भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है। यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना शुरू किया, जिससे रूस उसकी ऊर्जा सप्लाई का बड़ा स्रोत बन गया। हालांकि, अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के चलते 2026 तक रूस की हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई है।

अमेरिकी दबाव पर रूस का जवाब
लावरोव ने अमेरिका की नीतियों को “अनुचित प्रतिस्पर्धा” बताते हुए कहा कि रूस-भारत के समझौते बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि रूस यह सुनिश्चित करेगा कि भारत को तय अनुबंधों के अनुसार तेल मिलता रहे।

विशेषज्ञों की राय बंटी हुई
ऊर्जा मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत को रूस के साथ लंबी अवधि के समझौते करने चाहिए ताकि आपूर्ति सुरक्षित रहे। वहीं कुछ विश्लेषकों का कहना है कि भारत खुले तौर पर ऐसा कदम नहीं उठाएगा और अमेरिका व रूस के बीच संतुलन बनाए रखेगा।

आगे क्या? भारत के लिए चुनौती
मौजूदा हालात में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना है। रूस का भरोसा राहत जरूर देता है, लेकिन अमेरिका के दबाव और वैश्विक राजनीति के बीच भारत को सावधानी से कदम बढ़ाने होंगे।

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