Rajnath Singh ने BBAU में तोड़ा प्रोटोकॉल, बोले- ‘पहले कुलपति का नाम लूंगा’; ब्रजेश पाठक ने छात्रों से कहा- टेंशन लेना नहीं, देना है

Rajnath Singh ने दीक्षांत समारोह में क्यों तोड़ा प्रोटोकॉल?

Rajnath Singh ने शनिवार को लखनऊ स्थित बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU) के 11वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने खुद प्रोटोकॉल का जिक्र करते हुए कहा कि यह शिक्षण संस्थान है, इसलिए वह सामान्य प्रोटोकॉल से अलग हटकर सबसे पहले विश्वविद्यालय के कुलपति का नाम ले रहे हैं। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का नाम लिया।

करीब साढ़े तीन साल के अंतराल के बाद आयोजित इस दीक्षांत समारोह में 8,551 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें से 22 विद्यार्थियों को मंच से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया।

Rajnath Singh बोले- साइकिल और बैलगाड़ी से रॉकेट ले जाने वाला भारत मंगल तक पहुंचा
समारोह को संबोधित करते हुए Rajnath Singh ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और तकनीकी प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक दौर ऐसा था जब भारत में रॉकेट को साइकिल और बैलगाड़ी के जरिए ले जाया जाता था, लेकिन आज वही देश मंगल तक पहुंच चुका है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने अंतरिक्ष में निजी स्टेशन और मानव मिशन की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारियों का भी जिक्र किया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की तकनीकी क्षमता में बदलाव केवल अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है। देश में स्टार्टअप, इनोवेशन और नई तकनीकों को लेकर भी युवाओं का उत्साह बढ़ा है।

‘मेक इन इंडिया’ के पीछे ‘बिलीव इन इंडिया’ की भावना

Rajnath Singh ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के पीछे सिर्फ उत्पादन बढ़ाने की सोच नहीं है, बल्कि इसके पीछे ‘बिलीव इन इंडिया’ यानी भारत पर विश्वास की भावना भी है।

उन्होंने कहा कि भारत आज अपनी सभ्यता, संस्कृति और क्षमता को लेकर पहले की तुलना में अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, इसी आत्मविश्वास का असर देश के इनोवेशन, स्टार्टअप और तकनीकी क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि एक समय भारत के अंतरिक्ष अभियानों का मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बात को गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल बनाए गए नियमों का पालन करने वाला देश नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में नियम तय करने की स्थिति में पहुंच रहा है।

युवाओं को लेकर Rajnath Singh ने जताया भरोसा

दीक्षांत समारोह में Rajnath Singh ने युवाओं की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और नई तकनीक, स्टार्टअप तथा इनोवेशन युवाओं के सामने नए अवसर खोल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें देश के प्रतिभाशाली युवाओं से लगातार संवाद करने का मौका मिलता है और ऐसे युवाओं को देखकर उनका विश्वास और मजबूत होता है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि देश के ऐसे नौजवानों के रहते भारत को दुनिया की सुपरपावर बनने से कोई नहीं रोक सकता।

उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी कहा कि डिग्री को जीवन की अंतिम मंजिल नहीं समझना चाहिए। डिग्री नई संभावनाओं के दरवाजे खोलने का माध्यम है और किसी व्यक्ति का भविष्य केवल उसकी पढ़ाई के विषय से तय नहीं होता।

डिग्री मंजिल नहीं, नई संभावनाओं का रास्ता

Rajnath Singh ने नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. वेंकटरमन रामकृष्णन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने फिजिक्स की पढ़ाई की थी, लेकिन बाद में बायोलॉजी के क्षेत्र में काम किया और वर्ष 2009 में केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार हासिल किया।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अपनी संभावनाओं को किसी एक डिग्री या विषय तक सीमित नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, शिक्षा व्यक्ति को नए क्षेत्रों में जाने और अपनी क्षमता साबित करने का अवसर देती है।

आंबेडकर के जीवन से छात्रों को दी सीख

रक्षा मंत्री ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों से अन्याय और मुश्किल परिस्थितियों के सामने सकारात्मक रास्ता अपनाने की अपील की।

Rajnath Singh ने कहा कि स्कूल के दिनों में डॉ. आंबेडकर को उस नल से पानी पीने की अनुमति नहीं थी, जिससे दूसरे बच्चे पानी पीते थे। इसके बावजूद उन्होंने हिंसा का रास्ता नहीं चुना। उन्होंने शिक्षा को अपना हथियार बनाया और आगे चलकर सामाजिक बुराइयों तथा अन्याय के खिलाफ संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया।

राजनाथ सिंह ने विद्यार्थियों से Justice, Equality और Liberty जैसे मूल्यों पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि उपलब्धियां हासिल करने के साथ अहंकार से बचना भी जरूरी है।

ब्रजेश पाठक बोले- ‘टेंशन लेना नहीं, टेंशन देना है’

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें ‘टेंशन लेना नहीं, टेंशन देना है।’

ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल के निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि जिस शहर की पहचान मुस्कुराने के लिए होती है, वहां आज ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस का नाम सुनकर दुश्मन देशों में भी चिंता बढ़ती है।

BBAU के 11वें दीक्षांत समारोह में 8,551 छात्रों को मिली डिग्री

BBAU का यह 11वां दीक्षांत समारोह करीब साढ़े तीन साल बाद आयोजित हुआ। समारोह में कुल 8,551 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि 22 विद्यार्थियों को मंच से सम्मानित किया गया।

इस मौके पर Rajnath Singh ने विश्वविद्यालय को अपने संसदीय क्षेत्र में स्थित होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर बना यह शिक्षण संस्थान उनके संसदीय क्षेत्र में होना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें बड़े लक्ष्य तय करने चाहिए, लेकिन सफलता के साथ विनम्रता बनाए रखना भी जरूरी है।

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