संसद से पहले विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, NCPI विवाद पर सर्वदलीय बैठक से किया वॉकआउट

The Red Ink
मानसून सत्र शुरू होने से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ गई। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए 20 सांसदों के नए गुट NCPI को बैठक में बुलाए जाने का विपक्ष ने विरोध किया और कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके समेत कई दल बैठक बीच में छोड़कर बाहर निकल गए। विपक्ष का कहना है कि जब तक लोकसभा अध्यक्ष इस गुट पर फैसला नहीं लेते, तब तक उसे अलग पार्टी की तरह मान्यता नहीं दी जा सकती।

20 बागी सांसदों की मौजूदगी बनी विवाद की वजह
रविवार को संसद एनेक्सी भवन में हुई सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रमुख दल मौजूद थे। लेकिन माहौल तब गर्मा गया, जब TMC से अलग हुए 20 सांसदों के प्रतिनिधियों को भी बैठक में शामिल किया गया। विपक्ष ने इसे संसदीय प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए विरोध दर्ज कराया और वॉकआउट कर दिया।

महुआ मोइत्रा बोलीं- फैसला पहले, मान्यता बाद में
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि संसद के रिकॉर्ड में अभी भी इन सांसदों की गिनती टीएमसी के खाते में है। पार्टी ने दलबदल कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग पहले ही लोकसभा अध्यक्ष के सामने रख दी है। ऐसे में फैसला आने से पहले उन्हें अलग राजनीतिक दल के रूप में बैठाना गलत परंपरा है। महुआ ने कहा कि यदि समय रहते निर्णय नहीं हुआ तो पार्टी अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगी।

सरकार ने दिया जवाब
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के विरोध को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि जिन 20 सांसदों ने अलग पार्टी के तौर पर दावा किया है, उन्होंने स्पीकर के पास औपचारिक आवेदन दिया है। जब तक उस पर फैसला नहीं हो जाता, सरकार सभी सांसदों को बातचीत की प्रक्रिया में शामिल करने की जिम्मेदारी निभाएगी। रिजिजू ने विपक्ष से मानसून सत्र को सुचारु रूप से चलाने की भी अपील की और कहा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सभी दलों को सहयोग करना चाहिए।

बागी सांसदों का पलटवार
टीएमसी से अलग हुए सांसदों ने कहा कि उन्हें आधिकारिक निमंत्रण मिला था, इसलिए वे बैठक में पहुंचे। उनका कहना है कि संसद के भीतर उनकी स्थिति का अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष करेंगे और वही तय करेंगे कि उन्हें किस हैसियत से मान्यता मिलेगी।

सत्र की शुरुआत से पहले बढ़ा सियासी तनाव
20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में यह मुद्दा पहले ही दिन जोरदार हंगामे की वजह बन सकता है। एक तरफ टीएमसी दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग कर रही है, तो दूसरी तरफ बागी सांसद अलग पहचान और संसदीय मान्यता की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में संसद का शुरुआती दौर काफी टकराव भरा रहने के संकेत मिल रहे हैं।

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