लखनऊ नगर निगम में सियासी संग्राम: महिला आरक्षण पर सदन में बवाल, मेयर ने बुलवाई पुलिस

The Red Ink:
लखनऊ नगर निगम का सदन बुधवार को सियासी टकराव का अखाड़ा बन गया, जब महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर बुलाए गए विशेष सत्र में विपक्षी पार्षदों ने जोरदार हंगामा कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि मेयर सुषमा खर्कवाल को पुलिस बुलानी पड़ी।

महिला आरक्षण पर बुलाई गई बैठक बनी विवाद की वजह
मेयर की ओर से लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े बिल के गिरने पर निंदा प्रस्ताव पारित कराने के लिए सदन बुलाया गया था लेकिन सत्र शुरू होते ही सपा और कांग्रेस पार्षदों ने इसे स्थानीय मुद्दों से भटकाव बताते हुए विरोध शुरू कर दिया।

‘नगर निगम का काम शहर, न कि संसद’- विपक्ष का हमला
विपक्षी पार्षदों का कहना था कि नगर निगम का एजेंडा शहर की सफाई, सीवर और विकास कार्य होना चाहिए, न कि राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक मुद्दे। इसी बात को लेकर सदन में तीखी नारेबाज़ी और हंगामा हुआ।

हंगामे के बीच BJP ने पास कराया प्रस्ताव
हंगामे के बावजूद भाजपा पार्षदों ने बहुमत के दम पर निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया। इस दौरान सदन में शोर-शराबा और विरोध लगातार जारी रहा।

मेयर का पलटवार—‘मेरे साथ अभद्रता हुई’
मेयर सुषमा खर्कवाल ने विपक्ष पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनके आवास पर तोड़फोड़ और अभद्रता की गई। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव का नाम लेते हुए सवाल किया कि क्या इस तरह का व्यवहार सही है।

बयानबाज़ी ने बढ़ाया सियासी तापमान
भाजपा पार्षद रामनरेश रावत ने सख्त लहजे में कहा कि जो लोग मेयर के साथ बदसलूकी में शामिल थे, उन्हें जवाब दिया जाएगा। वहीं नामित पार्षद नेहा सिंह ने विपक्ष पर महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाया।

विपक्ष का आरोप-‘हमें बोलने नहीं दिया जाता’
सपा पार्षद रजनी यादव ने कहा कि सदन में विपक्ष की आवाज़ दबाई जा रही है और शहर के असली मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

स्थानीय बनाम राष्ट्रीय मुद्दों पर टकराव तेज
यह पूरा घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि नगर निगम जैसे स्थानीय मंच भी अब राष्ट्रीय राजनीति के प्रभाव से अछूते नहीं रहे हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने एजेंडे पर अड़े दिखे, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।

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