The Red Ink
राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित सरकारी कार्यालय जवाहर भवन में सोमवार सुबह भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में चौथी मंजिल से उठता काला धुआं करीब दो किलोमीटर दूर तक दिखाई देने लगा। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 15 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब एक घंटे के अभियान के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं है।
चौथी मंजिल से उठीं लपटें, कैंटीन से आग फैलने की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग जवाहर भवन की चौथी मंजिल पर लगी, जहां खाद्य एवं रसद विभाग का कार्यालय और कॉन्फ्रेंस हॉल स्थित है। कर्मचारियों का कहना है कि आग सबसे पहले कैंटीन क्षेत्र में लगी और देखते ही देखते कॉन्फ्रेंस हॉल तक पहुंच गई, जिससे फर्नीचर और अन्य सामान जलकर खाक हो गया। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
रेस्क्यू के दौरान छज्जा गिरा, बड़ा हादसा टला
आग बुझाने की कार्रवाई के दौरान इमारत की ऊपरी मंजिल का एक छज्जा और बाउंड्री वॉल का हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। उस समय नीचे कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। सुरक्षा के मद्देनज़र पूरे परिसर को खाली करा दिया गया और आसपास के इलाके की घेराबंदी कर दी गई।
डिप्टी सीएम समेत वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जिलाधिकारी विशाख जी., जॉइंट सीपी बबलू कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों का जायजा लिया। डिप्टी सीएम ने कहा कि यदि भवन की संरचना जर्जर पाई जाती है तो लोक निर्माण विभाग (PWD) से जांच कराकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
फायर विभाग ने चलाया बड़ा ऑपरेशन
डीजी फायर पद्मजा चौहान ने बताया कि आग बुझाने के लिए 15 दमकल वाहन और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म सहित विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल आग पूरी तरह नियंत्रित कर ली गई है और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। आग के कारणों की जांच रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद की जाएगी।
सरकारी दफ्तरों में कामकाज प्रभावित
जवाहर भवन में खाद्य एवं रसद विभाग के अलावा न्याय प्राधिकरण, मलेरिया विभाग और अन्य सरकारी कार्यालय भी संचालित होते हैं। आग लगने की घटना के बाद पूरे भवन में कामकाज प्रभावित रहा और अधिकारियों ने सुरक्षा जांच पूरी होने तक प्रभावित हिस्से को बंद रखने का फैसला किया है।




