The Red Ink
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े फर्जी डॉक्टर मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए खुलासे सामने आ रहे हैं। ताज़ा जानकारी के मुताबिक, आरोपी हस्साम और उसके नेटवर्क को कुछ अस्पतालों और डॉक्टरों से आर्थिक मदद मिलने के संकेत मिले हैं। इसी फंडिंग के सहारे कथित तौर पर स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों को जाल में फंसाया जाता था।
मरीजों को फंसाने का तरीका
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह से जुड़े बिचौलिए अस्पतालों में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को निशाना बनाते थे। सस्ते इलाज का लालच देकर उन्हें अपने नेटवर्क से जुड़े डॉक्टरों और अस्पतालों तक पहुंचाया जाता था। इसके बदले दलालों को कमीशन दिया जाता था, जिससे पूरा रैकेट संचालित होता था।
अलग-अलग समुदायों को अलग तरीके से टारगेट करने के आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि मरीजों को प्रभावित करने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाई जाती थीं। कुछ मामलों में धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। फिलहाल इन पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।
कई डॉक्टर और अस्पताल रडार पर
पुलिस की जांच में अब तक चार डॉक्टरों और कुछ निजी अस्पतालों के नाम सामने आए हैं। एजेंसियां इनके खिलाफ सबूत जुटा रही हैं और पुख्ता प्रमाण मिलने पर कार्रवाई की तैयारी है।
वेस्ट यूपी तक फैले नेटवर्क के संकेत
प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैले होने की आशंका जताई गई है। मेरठ, मुरादाबाद, बुलंदशहर और गाजियाबाद जैसे जिलों में भी इसकी कड़ियां जुड़ी होने की बात सामने आई है। मोबाइल फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद और बड़े खुलासों की उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला?
21 अप्रैल को KGMU परिसर से एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा गया था, जो खुद को डॉक्टर बताकर गतिविधियां चला रहा था। आरोप है कि वह मेडिकल छात्राओं को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण और अन्य साजिशों में शामिल करने की कोशिश कर रहा था। संस्थान प्रशासन के निर्देश पर बनी जांच टीम की निगरानी में यह मामला सामने आया। इसके बाद आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।




