The Red Ink
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में राज्य का पहला अत्याधुनिक बोन बैंक शुरू हो गया है। KGMU Bone Bank के शुरू होने से अब उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें जोड़ प्रत्यारोपण, रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट या गंभीर हड्डी संबंधी सर्जरी के दौरान अतिरिक्त हड्डी की जरूरत पड़ती है। अब तक ऐसी स्थिति में मरीजों को दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे बड़े संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा उत्तर प्रदेश में ही उपलब्ध होगी।
एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई सुविधा
KGMU के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में स्थापित इस बोन बैंक को लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा प्रदेश में हड्डी प्रत्यारोपण और ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
अब तक उत्तर प्रदेश के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में बोन बैंक की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में मरीजों को बाहर के संस्थानों से हड्डियां मंगानी पड़ती थीं, जिससे इलाज का खर्च और समय दोनों बढ़ जाते थे।
ऑर्थोपेडिक्स विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, केवल एक फीमोरल हेड (जांघ की हड्डी का ऊपरी हिस्सा) मंगाने में ही मरीजों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे। बोन बैंक शुरू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
एक साथ 120 हड्डियों को सुरक्षित रखने की क्षमता
KGMU Bone Bank की सबसे बड़ी विशेषता इसकी भंडारण क्षमता है। विभाग के अनुसार, इसमें एक समय में लगभग 120 हड्डियों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
इन हड्डियों को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर संरक्षित किया जाएगा। किसी भी हड्डी का उपयोग सीधे ऑपरेशन में नहीं किया जाएगा, बल्कि उसे निर्धारित समय तक सुरक्षित रखने और सभी चिकित्सीय परीक्षणों के बाद ही मरीजों के लिए जारी किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम तापमान पर सुरक्षित रखने से हड्डियों की गुणवत्ता बनी रहती है और संक्रमण का खतरा भी कम हो जाता है।
किन मरीजों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ?
KGMU में रोजाना कई जोड़ प्रत्यारोपण और जटिल हड्डी सर्जरी की जाती हैं। इसके अलावा पूरे प्रदेश में हर वर्ष हजारों मरीज ऐसी सर्जरी से गुजरते हैं, जिनमें अतिरिक्त हड्डी की आवश्यकता पड़ सकती है।
विशेष रूप से इन मामलों में बोन बैंक की भूमिका महत्वपूर्ण होगी- जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी, रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट, बोन ट्यूमर सर्जरी, गंभीर दुर्घटनाओं में क्षतिग्रस्त हड्डियों का पुनर्निर्माण और जटिल ऑर्थोपेडिक रिकंस्ट्रक्शन।
ऐसे मामलों में मरीज की अपनी हड्डी पर्याप्त नहीं होती या वह उपयोग योग्य नहीं बचती। तब बोन बैंक से प्राप्त हड्डी उपचार का अहम हिस्सा बन सकती है।
हड्डियां कहां से आएंगी?
KGMU Bone Bank के लिए हड्डियों का संग्रह पूरी तरह चिकित्सीय और नियामक प्रक्रियाओं के तहत किया जाएगा।
अस्पताल के अनुसार, शुरुआत में हड्डियां मुख्य रूप से उन मरीजों से प्राप्त होंगी जिनकी सर्जरी के दौरान कोई अंग या हड्डी का हिस्सा निकाला जाता है। इसके अलावा गंभीर दुर्घटनाओं के मामलों में चिकित्सकीय आवश्यकता के तहत हटाई गई हड्डियों का भी उपयोग किया जा सकेगा।
हालांकि, हर हड्डी को संग्रहित करने से पहले मरीज की सहमति और मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
संक्रमण रोकने के लिए सख्त जांच
बोन बैंक की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी वजह से प्रत्येक हड्डी को संग्रहित करने से पहले कई स्तरों की जांच से गुजरना होगा।
हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, एचआईवी और अन्य संक्रामक रोगों की जांच अनिवार्य होगी। जांच में सुरक्षित पाए जाने के बाद ही हड्डी को संरक्षित किया जाएगा।
चिकित्सकों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मरीज में संक्रमण फैलने का जोखिम बिल्कुल न रहे।
आठ चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
KGMU Bone Bank में हड्डी को संग्रहित करने से लेकर प्रत्यारोपण तक की पूरी प्रक्रिया अत्यंत नियंत्रित और वैज्ञानिक होगी।
इस प्रक्रिया में हड्डी को निकालना, नमूना परीक्षण, संक्रमणमुक्त करना, सफाई, पैकेजिंग, विशेष पहचान संख्या देना, क्वारंटीन भंडारण और अंतिम चिकित्सीय मंजूरी जैसे कई चरण शामिल होंगे।
हर हड्डी का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल और दस्तावेजी रूप से सुरक्षित रखा जाएगा ताकि भविष्य में उसकी ट्रेसबिलिटी बनी रहे।
कोल्ड चेन और सुरक्षा पर विशेष ध्यान
हड्डियों के संरक्षण के लिए अत्याधुनिक डीप फ्रीजर का इस्तेमाल किया जा रहा है। परिवहन के दौरान ड्राई आइस और विशेष कोल्ड चेन सिस्टम का उपयोग होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार किसी हड्डी को डीप फ्रीजर से निकालकर पिघलाया गया तो उसे दोबारा फ्रीज नहीं किया जाएगा। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
साथ ही “सही हड्डी, सही मरीज और सही समय” के सिद्धांत के तहत प्रत्येक प्रत्यारोपण से पहले सभी दस्तावेजों और पहचान विवरणों का मिलान किया जाएगा।
प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगी मजबूती
KGMU में स्थापित यह बोन बैंक केवल एक नई सुविधा नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे मरीजों का इलाज तेज, सस्ता और अधिक सुलभ होगा।
फिलहाल यह सुविधा KGMU के मरीजों के लिए उपलब्ध रहेगी। भविष्य में यदि पर्याप्त भंडार उपलब्ध होता है तो अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों को भी हड्डियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि KGMU Bone Bank आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को हड्डी प्रत्यारोपण और ऑर्थोपेडिक उपचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकता है।



