The Red Ink
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस आलाकमान से किए गए वादे के मुताबिक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। इस सत्ता परिवर्तन के साथ कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रही खींचतान पर फिलहाल विराम लगता दिखाई दे रहा है।
राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिद्धारमैया ने अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय को सौंप दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताकर उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया और अब वह संगठन के फैसले का सम्मान कर रहे हैं।
भावुक दिखे सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार
सत्ता हस्तांतरण से पहले हुई कैबिनेट बैठक का माहौल काफी भावुक रहा। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान कई मंत्री भावुक हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया को गले लगाया और उनका आशीर्वाद भी लिया। बैठक में मौजूद कई नेताओं की आंखें नम दिखाई दीं। सिद्धारमैया ने मंत्रियों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया तो माहौल और भावुक हो गया।
कांग्रेस आलाकमान के फैसले के बाद बदली तस्वीर
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर लंबे समय से अंदरखाने खींचतान चल रही थी। 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद से ही यह चर्चा थी कि सत्ता साझा करने का फार्मूला तय हुआ था। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने दोनों नेताओं के साथ बैठक कर सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ किया। इसके बाद सिद्धारमैया ने पद छोड़ने का फैसला लिया।
दिल्ली की राजनीति में जाने से किया इनकार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजकर राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका देने का सुझाव भी दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। सिद्धारमैया पहले भी साफ कर चुके थे कि उनकी राजनीति की जड़ें कर्नाटक में हैं और वह राज्य की राजनीति में ही सक्रिय रहना चाहते हैं।
ओबीसी और AHINDA समीकरण पर रहेगा असर
सिद्धारमैया को कर्नाटक में AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) राजनीति का बड़ा चेहरा माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके इस्तीफे का असर कांग्रेस के सामाजिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर ओबीसी और कुरुबा समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ कांग्रेस के लिए अहम मानी जाती रही है।
बीजेपी ने साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ओबीसी राजनीति की बात करती है, लेकिन अपने ही ओबीसी मुख्यमंत्री को हटाने का फैसला ले लिया।
डीके शिवकुमार के सामने बड़ी चुनौती
अब डीके शिवकुमार के सामने सरकार और संगठन दोनों को संतुलित रखने की चुनौती होगी। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि 2028 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नए नेतृत्व और नई रणनीति के साथ आगे बढ़े।
नई सरकार के सामने ये होंगे बड़े मुद्दे
कर्नाटक में नई सरकार को आरक्षण, सामाजिक संतुलन, संगठनात्मक एकजुटता और विकास योजनाओं जैसे कई अहम मुद्दों पर फैसले लेने होंगे। सिद्धारमैया सरकार के दौरान तैयार हुई सामाजिक-आर्थिक सर्वे रिपोर्ट पर अंतिम फैसला भी अब नई कैबिनेट ही करेगी।




