The Red Ink
ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता रहे आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले अमेरिका और इसराइल को सख्त चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने साफ कहा है कि यदि अंतिम संस्कार के दौरान या उसके आसपास ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई की गई, तो उसका ऐसा जवाब दिया जाएगा जिसे विरोधी देश लंबे समय तक याद रखेंगे। इस बीच, तेहरान में अंतिम विदाई की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और करोड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
ईरान की दो टूक चेतावनी
ईरान के ख़ातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने अंतिम संस्कार से पहले अमेरिका, इसराइल और उनके सहयोगी देशों को स्पष्ट संदेश दिया कि वे किसी भी तरह की सैन्य या आक्रामक कार्रवाई करने की भूल न करें। उनका कहना था कि ईरान की सीमाओं या उसके हितों के खिलाफ उठाया गया कोई भी कदम सशस्त्र बलों की ओर से कड़े और निर्णायक जवाब का कारण बनेगा।
‘ईरानी जनता बदले के लिए तैयार’
मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ने वाली भीड़ यह संदेश देगी कि ईरानी जनता अपने सर्वोच्च नेता की मौत को भूली नहीं है और बदले की भावना के साथ एकजुट है। यह जानकारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से संबद्ध तसनीम समाचार एजेंसी ने अपने टेलीग्राम चैनल के माध्यम से साझा की।
तेहरान में करोड़ों लोगों के जुटने की तैयारी
तेहरान नगर पालिका के सांस्कृतिक एवं सामाजिक मामलों के उप प्रमुख मोहम्मद अमीन तवाकलिज़ादेह के अनुसार, 4 से 8 जुलाई के बीच होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में राजधानी तेहरान में करीब 1.5 से 2 करोड़ लोगों के पहुंचने का अनुमान है। इसी को देखते हुए प्रशासन सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की व्यापक तैयारियों में जुटा हुआ है।
भारत भी भेजेगा अपना प्रतिनिधिमंडल
भारत सरकार ने भी अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा 3 जुलाई को ईरान पहुंचकर भारत की ओर से अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
क्षेत्रीय तनाव पर दुनिया की नजर
ईरान की ताजा चेतावनी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा है। अमेरिका और इसराइल के साथ जारी टकराव के बीच तेहरान की ओर से दिया गया यह बयान क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक हलकों में गंभीरता से देखा जा रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम संस्कार के दौरान हालात किस दिशा में जाते हैं और क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या कूटनीतिक संयम कायम रहता है।




