The Red Ink
भारत और पाकिस्तान ने बुधवार को कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची साझा की। दोनों देशों के बीच यह प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को की जाती है। राजनयिक माध्यमों से नई दिल्ली और इस्लामाबाद में कैदियों की जानकारी का आदान-प्रदान हुआ।
भारत ने पाकिस्तान को सौंपी 439 लोगों की जानकारी
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत ने पाकिस्तान को उसकी हिरासत में मौजूद 386 पाकिस्तानी नागरिक कैदियों और 53 पाकिस्तानी मछुआरों की सूची सौंपी है। भारत ने इसके साथ ही पाकिस्तान से उन 188 भारतीय मछुआरों और नागरिक कैदियों की जल्द रिहाई और स्वदेश वापसी की मांग दोहराई है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।
13 भारतीय नागरिक कैदियों को कांसुलर एक्सेस देने की मांग
भारत ने पाकिस्तान से उन 13 भारतीय माने जाने वाले नागरिक कैदियों को तुरंत कांसुलर एक्सेस उपलब्ध कराने का आग्रह किया है, जिन्हें अभी तक राजनयिक सहायता नहीं मिल सकी है। कांसुलर एक्सेस के तहत किसी दूसरे देश की जेल में बंद नागरिक को उसके देश के अधिकारियों से संपर्क और कानूनी सहायता का अवसर दिया जाता है।
पाकिस्तान ने भी भारत को दी कैदियों की सूची
वहीं पाकिस्तान ने भी भारत को अपनी हिरासत में मौजूद भारतीय या भारतीय माने जाने वाले नागरिक कैदियों और मछुआरों की जानकारी दी है। पाकिस्तान की ओर से साझा की गई सूची में 52 नागरिक कैदी और 198 मछुआरे शामिल हैं।
कांसुलर समझौते के तहत होती है प्रक्रिया
भारत और पाकिस्तान के बीच 2008 में हुए कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत दोनों देश साल में दो बार एक-दूसरे की जेलों में बंद नागरिकों की सूची साझा करते हैं। इसका उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों की पहचान, कानूनी सहायता और रिहाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
मछुआरों की गिरफ्तारी बना रहता है बड़ा मुद्दा
भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा से जुड़े मामलों में अक्सर मछुआरों की गिरफ्तारी होती रही है। कई बार मछुआरे अनजाने में समुद्री सीमा पार कर दूसरे देश की सीमा में पहुंच जाते हैं। दोनों देशों के बीच मानवीय आधार पर ऐसे मामलों में रिहाई और वापसी को लेकर बातचीत होती रहती है।




