The Red Ink
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में शुक्रवार देर रात एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल का भारी स्लैब अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे के वक्त कई मजदूर पुल के नीचे आराम कर रहे थे। कुछ ही सेकंड में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते मलबे के नीचे छह मजदूरों की जिंदगी दब गई। घटना ललपुरा थाना क्षेत्र की है, जहां उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की ओर से करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से दो लेन का पुल बनाया जा रहा है। यह पुल मोराकांड से कुरारा गांव को जोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा था। लेकिन शुक्रवार रात करीब दो बजे आई तेज आंधी और बारिश ने निर्माण स्थल को मातम में बदल दिया।
“आंधी से बचने के लिए लेट गए थे… तभी सब खत्म हो गया”
हादसे के चश्मदीद मजदूर सुरेश कुमार ने बताया कि पुल पर दो शिफ्ट में काम चल रहा था। पहली शिफ्ट के मजदूर नीचे आराम कर रहे थे, जबकि दूसरी शिफ्ट के कुछ मजदूर ऊपर काम कर रहे थे। अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और बारिश शुरू हो गई। सुरेश के मुताबिक, “हम लोग आंधी से बचने के लिए पुल पर ही लेट गए थे। तभी जोरदार आवाज हुई और पूरा स्लैब नीचे गिर गया। कुछ समझ ही नहीं आया।” हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कई मजदूर जान बचाकर भागे, जबकि कुछ मलबे के नीचे दब गए।
6 मजदूरों की मौत, कई परिवारों में पसरा मातम
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों में चार बांदा और दो हमीरपुर के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई—
लोकेंद्र निषाद (22) — बांदा
कुलदीप निषाद (19) — बांदा
सावंत यादव (28) — बांदा
सभाजीत (30) — बांदा
पुष्पेंद्र सिंह चौहान (34) — हमीरपुर
राजेश पाल (42) — हमीरपुर
जैसे ही हादसे की खबर गांवों तक पहुंची, परिवारों में कोहराम मच गया। राजेश पाल की बेटियां पिता का शव देखकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
SDRF ने संभाला मोर्चा, रातभर चलता रहा रेस्क्यू
हादसे के तुरंत बाद पुलिस, प्रशासन और SDRF की टीम मौके पर पहुंची। जेसीबी मशीनों की मदद से भारी मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। अधिकारियों के मुताबिक कई घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा। एएसपी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई थी। शुरुआती समय में कई मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका थी।
ब्रिज कॉरपोरेशन ने कही जांच की बात
उत्तर प्रदेश ब्रिज कॉरपोरेशन के एमडी धर्मवीर सिंह ने बताया कि पुल अभी निर्माणाधीन था और पिलरों पर लगाए गए स्लैब का सपोर्ट सिस्टम तेज आंधी और तूफान के कारण हिल गया, जिससे पूरा हिस्सा नीचे आ गिरा। उन्होंने कहा कि हादसे की जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी बताया कि पुल निर्माण की थर्ड पार्टी ऑडिट IIT-BHU की निगरानी में कराई जा रही थी।
सीएम योगी ने जताया दुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
दिसंबर 2026 तक पूरा होना था पुल
करीब 700 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण मार्च 2024 में शुरू हुआ था और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना था। लेकिन निर्माण के बीच हुए इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




