The Red Ink
हज यात्रा के बीच अचानक बढ़े खर्च ने हजारों यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देशभर के हाजियों से अब ₹10,000 अतिरिक्त किराया वसूला जा रहा है। यह फैसला यात्रा शुरू होने के बाद लागू हुआ, जिससे खासकर उत्तर प्रदेश के करीब 17 हजार यात्रियों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
कुल खर्च 3.80 लाख के पार, पहले से ज्यादा महंगा हज
इस साल हज यात्रा की कुल लागत करीब ₹3.80 लाख तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक है। पहले जहां यह खर्च लगभग ₹3.37 लाख था, वहीं अब बीच यात्रा में बढ़े किराए ने यात्रियों का बजट बिगाड़ दिया है।
क्यों बढ़ाया गया किराया?
अधिकारियों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी हालात के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके बाद एयरलाइंस ने किराया बढ़ा दिया। सरकार की ओर से जारी सर्कुलर में प्रति यात्री 100 डॉलर अतिरिक्त लेने का फैसला किया गया, जो भारतीय मुद्रा में करीब ₹10,000 बैठता है। हज कमेटी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह बढ़ा हुआ शुल्क 15 मई तक जमा करना अनिवार्य है, चाहे यात्री यात्रा पर निकल चुके हों या तैयारी में हों।
हाजियों में नाराजगी, बोले- बीच सफर में बोझ क्यों?
अचानक लिए गए इस फैसले से यात्रियों में असंतोष है। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने महीनों पहले तय रकम जमा कर दी थी, ऐसे में बीच यात्रा अतिरिक्त पैसे मांगना गलत है। कुछ परिवारों पर इसका असर और ज्यादा पड़ा है—जहां एक ही घर से कई लोग हज पर जा रहे हैं, वहां खर्च हजारों में बढ़ गया है।
धार्मिक नेताओं ने उठाए सवाल
लखनऊ में धार्मिक विद्वानों और संगठनों ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि हज जैसे पवित्र सफर के दौरान इस तरह का आर्थिक दबाव उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस फैसले पर दोबारा विचार किया जाए और भविष्य में इस तरह के बदलाव पहले से घोषित किए जाएं, ताकि यात्रियों को परेशानी न हो।
सुविधाओं पर भी उठे सवाल
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बढ़ते खर्च के बावजूद सुविधाओं में उसी अनुपात में सुधार नहीं दिख रहा। इससे यात्रियों की चिंता और बढ़ गई है।
क्या हो सकता है आगे?
मामला अब सरकार और हज कमेटी के सामने है। यात्रियों और धार्मिक संगठनों की मांग है कि इस सर्कुलर को वापस लिया जाए या कम से कम राहत दी जाए। फिलहाल, तय समयसीमा के भीतर अतिरिक्त रकम जमा करना यात्रियों के लिए जरूरी कर दिया गया है।




