Habeas Corpus: मुत्तलिव केस में पुलिस की जांच पर हाईकोर्ट नाराज़, CBI को सौंपी जांच; 3 हफ्ते में रिपोर्ट

Habeas Corpus मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुज़फ्फरनगर के हिस्ट्रीशीटर मुत्तलिव के लापता होने की जांच को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने पुलिस जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने CBI को तीन सप्ताह के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की ओर से की गई तलाश और जांच के तरीके पर सवाल उठाए। अदालत के सामने यह बात आई कि पुलिस टीम मुत्तलिव की तलाश के नाम पर बस स्टैंड और सरकारी दफ्तरों जैसी जगहों पर उसकी तस्वीरें चस्पा कर रही थी, लेकिन उसके परिजनों, पड़ोसियों और जान-पहचान के लोगों के बयान तक दर्ज नहीं किए गए।

Habeas Corpus मामले में पुलिस की कार्यशैली पर हाईकोर्ट नाराज़

Habeas Corpus मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मुत्तलिव की तलाश के लिए पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने इस बात पर गंभीर सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति लापता है तो उसकी तलाश के लिए उसके परिवार, पड़ोस और करीबी संपर्कों से पूछताछ जैसे जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए गए।

कोर्ट के मुताबिक, पुलिस की जांच केवल तस्वीरें चस्पा करने तक सीमित दिखाई दे रही थी। बस स्टैंड और सरकारी कार्यालयों में तस्वीरें लगाए जाने के बावजूद जांच में उन लोगों से पूछताछ नहीं की गई, जो मुत्तलिव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते थे।

अदालत ने पुलिस की इस कार्यशैली को गंभीरता से लेते हुए सवाल किया कि यह पुलिस की अक्षमता है या फिर मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है।

CBI को केस डायरी सौंपेगी पुलिस

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मुत्तलिव के लापता होने की जांच CBI करेगी। CBI का संबंधित कार्यालय पुलिस से मामले की केस डायरी हासिल करेगा और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अपनी जांच शुरू करेगा।

अदालत के 11 अगस्त 2026 के विस्तृत आदेश की प्रति भी CBI को भेजी जाएगी। इस आदेश में मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का उल्लेख किया गया है।

इनमें गैर-जमानती वारंट की तारीख में कथित हेराफेरी और काट-छांट का मुद्दा भी शामिल है। अब CBI मामले की जांच के दौरान इन पहलुओं की भी पड़ताल करेगी।

तीन सप्ताह में प्रारंभिक रिपोर्ट देगी CBI

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Habeas Corpus मामले में CBI को स्पष्ट समयसीमा भी दी है। अदालत ने जांच एजेंसी को तीन सप्ताह के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।

इस आदेश के बाद अब मामले की जांच पुलिस से हटकर CBI की निगरानी में आगे बढ़ेगी। CBI सबसे पहले पुलिस से केस डायरी और मामले से जुड़े दस्तावेज हासिल करेगी। इसके बाद अब तक हुई जांच और मुत्तलिव की तलाश के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी।

परिजनों और पड़ोसियों के बयान क्यों नहीं हुए?

हाईकोर्ट की नाराजगी की सबसे बड़ी वजहों में से एक यह भी रही कि पुलिस ने मुत्तलिव के परिजनों, पड़ोसियों और जान-पहचान के लोगों के बयान दर्ज नहीं किए थे। अदालत ने जांच की इस कमी को गंभीरता से लिया।

लापता होने की परिस्थितियों को समझने के लिए परिवार और करीबी लोगों से पूछताछ महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में पुलिस की ओर से इन लोगों के बयान दर्ज नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए।

अब CBI की जांच में इन पहलुओं पर भी ध्यान दिए जाने की संभावना है। एजेंसी मामले की उपलब्ध केस डायरी और अन्य रिकॉर्ड की जांच करने के साथ यह भी देखेगी कि पुलिस ने अब तक किन पहलुओं पर कार्रवाई की और किन बिंदुओं की जांच नहीं हुई।

वारंट की तारीख में कथित हेराफेरी का भी मुद्दा

हाईकोर्ट के 11 अगस्त 2026 के विस्तृत आदेश में गैर-जमानती वारंट की तारीख में कथित हेराफेरी और काट-छांट का भी जिक्र किया गया है। यह मामला जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण पहलू बन सकता है।

अदालत के आदेश के बाद CBI को अब मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड हासिल कर स्वतंत्र तरीके से जांच करनी है। तीन सप्ताह में प्रारंभिक रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश के कारण जांच की शुरुआती प्रगति पर भी अदालत की नजर रहेगी।

फिलहाल Habeas Corpus मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच की जिम्मेदारी CBI को मिल गई है।

पुलिस की जांच को लेकर अदालत द्वारा उठाए गए सवालों के बीच अब CBI की जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि मुत्तलिव के लापता होने के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई और जांच में किन पहलुओं की अनदेखी की गई।

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