Disha Patani Success Story: 500 रुपए से शुरू हुई कहानी…
Disha Patani Success Story उन कहानियों में से है, जिसमें शुरुआत में न बड़ा फिल्मी बैकग्राउंड था, न कोई गॉडफादर और न ही यह भरोसा कि अगला ऑडिशन जिंदगी बदल देगा। उत्तर प्रदेश के बरेली से निकलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही दिशा पाटनी ने मॉडलिंग को मौका दिया और देखते ही देखते उनकी जिंदगी की दिशा बदल गई।
मुंबई पहुंचने के शुरुआती दिनों में उनके पास सिर्फ 500 रुपए थे। शहर में कोई परिचित नहीं था और फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने के लिए उन्हें खुद ऑडिशन देने पड़ते थे। कई कोशिशों के बीच ‘हीरोपंती’ का ऑडिशन भी आया, लेकिन यहां उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद दिशा पीछे नहीं हटीं। उन्होंने पढ़ाई अधूरी छोड़ी, कैमरे के सामने काम करना जारी रखा और आखिरकार ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ ने उन्हें वह पहचान दी, जिसका वह इंतजार कर रही थीं।
आज दिशा पाटनी का नाम बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्रियों में लिया जाता है। हालांकि वहां तक पहुंचने का रास्ता उतना आसान नहीं था, जितना उनकी ग्लैमरस स्क्रीन इमेज देखकर लगता है।
बरेली से शुरू हुई दिशा की कहानी
दिशा पाटनी का जन्म 13 जून 1992 को उत्तर प्रदेश के बरेली में हुआ। उनका परिवार उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र से जुड़ी राजपूत पृष्ठभूमि वाला बताया जाता है। उनके पिता जगदीश सिंह पाटनी पुलिस अधिकारी रहे हैं, जबकि उनकी मां हेल्थ इंस्पेक्टर हैं।
दिशा की बड़ी बहन खुशबू पाटनी भारतीय सेना में मेजर रह चुकी हैं और फिटनेस के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनका छोटा भाई सूर्यांश पाटनी है।
ऐसे परिवार से आने वाली दिशा ने ग्लैमर की दुनिया में कदम रखा तो शुरुआत में उनके पास इंडस्ट्री का कोई स्थापित नेटवर्क नहीं था। उन्हें अपने दम पर रास्ता तलाशना पड़ा।
इंजीनियरिंग पढ़ते-पढ़ते मॉडलिंग की तरफ मुड़ीं
दिशा इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थीं। इसी दौरान उन्हें मॉडलिंग के कुछ अवसर मिलने लगे। एक तरफ कॉलेज की पढ़ाई थी और दूसरी तरफ कैमरे के सामने काम करने का मौका। धीरे-धीरे मॉडलिंग उनके लिए महज एक पार्ट-टाइम काम नहीं रही।
उन्होंने इंटरव्यू में बताया था कि बीटेक के सेकेंड ईयर में उन्हें मॉडलिंग के ऑफर मिलने शुरू हुए थे। काम के सिलसिले में मुंबई आना-जाना बढ़ा तो उन्हें महसूस हुआ कि उनका मन अभिनय और ग्लैमर की दुनिया में ज्यादा लग रहा है।
आखिरकार उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ने का कठिन फैसला लिया। यह फैसला उनके करियर का पहला बड़ा जोखिम था, लेकिन आगे चलकर यही उनकी सबसे अहम पसंद साबित हुआ।
18 की उम्र में मॉडलिंग, फिर बढ़ी पहचान
दिशा ने करीब 18 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू की थी। शुरुआत से ही वह अपने खर्चों के लिए खुद काम करना चाहती थीं। विज्ञापनों और मॉडलिंग प्रोजेक्ट्स ने उन्हें इंडस्ट्री के काम करने के तरीके को समझने का मौका दिया।
2013 में उन्होंने पॉन्ड्स फेमिना मिस इंडिया इंदौर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और फर्स्ट रनर-अप रहीं। इससे मॉडलिंग के क्षेत्र में उनकी पहचान और मजबूत हुई।
लेकिन रैंप और विज्ञापन उनके अंतिम लक्ष्य नहीं थे। दिशा धीरे-धीरे फिल्मों की तरफ बढ़ना चाहती थीं।
मुंबई आईं तो जेब में थे सिर्फ 500 रुपए
मुंबई में संघर्ष की बात करते हुए दिशा ने बताया था कि जब वह करीब 19 साल की उम्र में शहर आई थीं, तब उनके पास सिर्फ 500 रुपए थे।
यह वह दौर था जब उन्हें न फिल्मी परिवार का फायदा मिल रहा था और न ही किसी बड़े स्टार का सहारा। रहने से लेकर काम तलाशने तक सब कुछ खुद संभालना था।
ऑडिशन उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन गए। कभी किसी विज्ञापन के लिए कोशिश होती तो कभी किसी फिल्म के लिए। इस दौरान कई बार उन्हें निराशा भी मिली।
यही दौर Disha Patani Success Story की असली नींव बना, क्योंकि स्टार बनने से पहले उन्होंने उस शहर में खुद को साबित करने की कोशिश की, जहां हर दिन हजारों लोग एक मौका तलाशते हैं।
‘हीरोपंती’ ने दिया मौका, लेकिन किस्मत ने रोक दिया रास्ता
दिशा के करियर से जुड़ी सबसे चर्चित शुरुआती घटनाओं में ‘हीरोपंती’ का ऑडिशन भी है। यह वही फिल्म थी जिससे टाइगर श्रॉफ ने बॉलीवुड में डेब्यू किया था।
दिशा ने इस फिल्म के लिए ऑडिशन दिया, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ। बाद में उन्होंने खुद माना कि उस समय वह एक्टिंग को लेकर ज्यादा प्रशिक्षित नहीं थीं और उन्हें लगता था कि उनका ऑडिशन अच्छा नहीं गया था।
दिलचस्प बात यह है कि बाद में दिशा और टाइगर श्रॉफ ने कई फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में साथ काम किया। ‘हीरोपंती’ में जगह नहीं मिलने का मतलब दिशा के लिए सफर खत्म होना नहीं था। बल्कि इसके बाद उन्होंने दूसरी संभावनाओं पर ध्यान देना जारी रखा।
‘लोफर’ से बड़े पर्दे पर पहला कदम
2015 में दिशा को आखिरकार फिल्मी पर्दे पर आने का मौका मिला। उन्होंने निर्देशक पुरी जगन्नाध की तेलुगु फिल्म ‘लोफर’ में वरुण तेज के साथ अभिनय किया।
फिल्म में उन्होंने मौनी का किरदार निभाया। ‘लोफर’ बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ी सफलता नहीं बन सकी, लेकिन दिशा के लिए इसका महत्व अलग था।
अब वह सिर्फ मॉडल नहीं थीं। उनके नाम के साथ एक फिल्म भी जुड़ चुकी थी और बॉलीवुड का दरवाजा उनके लिए पहले से ज्यादा करीब आ चुका था।
‘एमएस धोनी’ ने रातों-रात बदल दी पहचान
फिर आया 2016, जिसने दिशा के करियर की दिशा बदल दी।
नीरज पांडे की फिल्म ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में दिशा ने प्रियंका झा का किरदार निभाया। फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत ने महेंद्र सिंह धोनी की भूमिका निभाई थी।
प्रियंका का किरदार कहानी में भावनात्मक महत्व रखता था। दिशा की भूमिका बहुत लंबी नहीं थी, लेकिन उनके किरदार का असर ऐसा रहा कि दर्शकों ने उन्हें नोटिस किया।
फिल्म की सफलता ने दिशा को घर-घर पहुंचा दिया। मॉडलिंग से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री अब बड़े पर्दे की एक पहचानी हुई नई स्टार बन चुकी थीं।
फिल्म के लिए दिशा को आईफा में ‘स्टार डेब्यू ऑफ द ईयर- फीमेल’ का पुरस्कार भी मिला। इसके बाद उनके पास फिल्मों के नए प्रस्ताव आने लगे।
जैकी चैन के साथ काम करने का मौका
‘एमएस धोनी’ की सफलता के बाद दिशा ने सिर्फ हिंदी फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। 2017 में वह जैकी चैन स्टारर ‘कुंग फू योगा’ में दिखाई दीं।
फिल्म में सोनू सूद समेत कई कलाकार थे। यह प्रोजेक्ट दिशा के लिए इसलिए भी खास था क्योंकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव मिला।
हालांकि असली कमर्शियल सफलता उनके लिए अभी बाकी थी।
‘बागी 2’ ने बढ़ाई लोकप्रियता
2018 में ‘बागी 2’ रिलीज हुई और दिशा की लोकप्रियता एक नए स्तर पर पहुंच गई। फिल्म में उनके साथ टाइगर श्रॉफ थे।
दिशा और टाइगर इससे पहले म्यूजिक वीडियो ‘बेफिक्रा’ में साथ नजर आ चुके थे। लेकिन ‘बागी 2’ ने दोनों की जोड़ी को बड़े पर्दे पर स्थापित कर दिया।
फिल्म ने दुनिया भर में 258 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार किया और उस साल की बड़ी कमर्शियल सफलताओं में शामिल रही।
दिशा की फिटनेस, स्क्रीन प्रेजेंस और टाइगर के साथ उनकी केमिस्ट्री चर्चा का विषय बनी। हालांकि अभिनय के लिहाज से उनके किरदार को लेकर आलोचना भी हुई। इसके बावजूद एक बात साफ थी—दिशा अब इंडस्ट्री में सिर्फ नई अभिनेत्री नहीं रह गई थीं।
सलमान खान के साथ ‘भारत’ और ‘राधे’
2019 में दिशा को सलमान खान के साथ ‘भारत’ में काम करने का अवसर मिला। अली अब्बास जफर की इस फिल्म में दिशा ने राधा का किरदार निभाया।
फिल्म के ‘स्लो मोशन’ गाने में सलमान और दिशा की जोड़ी दिखाई दी। दिशा ने बाद में इस अनुभव को खास बताया और कहा था कि उन्हें डांस करना पसंद है।
इसके बाद दोनों ‘राधे’ में भी साथ नजर आए। हालांकि फिल्म को समीक्षकों से खास प्रतिक्रिया नहीं मिली और इसकी रिलीज भी कोविड-19 के दौर से प्रभावित रही।
‘मलंग’ में अलग तरह का किरदार
दिशा के करियर में 2020 की ‘मलंग’ को भी अहम माना जाता है। मोहित सूरी की इस फिल्म में उन्होंने आदित्य रॉय कपूर, अनिल कपूर और कुणाल खेमू के साथ काम किया।
दिशा ने सारा नांबियार की भूमिका निभाई। इस बार उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा स्क्रीन स्पेस मिला और उनके अभिनय को भी पहले से अलग नजरिए से देखा गया।
दिशा ने अपने करियर के बारे में कहा था कि वह सिर्फ किसी रैंक या नंबर की दौड़ में शामिल होने के लिए फिल्में नहीं चुनतीं। उनके लिए यह जरूरी है कि वह अपने किरदार के सफर को महसूस करें और काम करने की प्रक्रिया का आनंद लें।
एक्टिंग की ट्रेनिंग नहीं ली, सेट पर सीखती रहीं
दिशा ने यह भी बताया है कि उन्होंने एक्टिंग की कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली। उनके लिए ऑडिशन और फिल्म सेट ही असली क्लासरूम रहे।
हर नई फिल्म में वह खुद को एक नए कलाकार की तरह देखती हैं और मानती हैं कि हर प्रोजेक्ट से कुछ नया सीखने को मिलता है।
शायद यही कारण है कि उनके करियर में ग्लैमरस भूमिकाओं के साथ एक्शन और अलग तरह के किरदारों की कोशिश भी दिखाई देती है।
करियर में आए उतार-चढ़ाव
‘मलंग’ के बाद दिशा के करियर में लगातार सफलता नहीं रही। ‘राधे’ और ‘एक विलेन रिटर्न्स’ जैसी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित कामयाबी नहीं मिली। 2024 में ‘योद्धा’ में उन्होंने एक्शन से जुड़ा किरदार निभाया। फिल्म भले ही बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी, लेकिन उनके एक्शन सीक्वेंस चर्चा में रहे।
उसी साल ‘कल्कि 2898 एडी’ में भी वह नजर आईं। फिल्म का उनका रोल सीमित था, लेकिन फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और वह एक बड़े पैन-इंडिया प्रोजेक्ट का हिस्सा बनीं।
‘कंगुवा’ से साउथ सिनेमा का अनुभव
दिशा ने 2024 में तमिल फिल्म इंडस्ट्री में भी कदम रखा। सूर्या स्टारर ‘कंगुवा’ में उन्होंने एंजेलिना का किरदार निभाया।
फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। दिशा के किरदार के स्क्रीन स्पेस को लेकर भी चर्चा हुई।
फिर भी उनके लिए यह अनुभव महत्वपूर्ण था, क्योंकि उनका करियर अब सिर्फ हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं था।
2026 में भी जारी है सफर
2026 में दिशा के करियर में कई प्रोजेक्ट्स जुड़े। ‘ओ’रोमियो’ में वह जूली के किरदार में नजर आईं। इसके अलावा ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘अवारापन 2’ भी उनके करियर का हिस्सा बने।
‘अवारापन 2’ में दिशा ने इमरान हाशमी के साथ मुख्य भूमिका निभाई। यह 2007 में आई ‘अवारापन’ का सीक्वल है।
एक दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी दिशा लगातार अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स के जरिए खुद को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
कैमरे के सामने ग्लैमरस, असल जिंदगी में खुद को मानती हैं इंट्रोवर्ट
दिशा की सोशल मीडिया और फिल्मों वाली छवि देखकर उन्हें बेहद कॉन्फिडेंट और सोशल पर्सनैलिटी समझना आसान है। लेकिन उन्होंने एक इंटरव्यू में खुद को इंट्रोवर्ट बताया था।
उन्होंने कहा था कि सामाजिक कार्यक्रमों में वह सहज महसूस नहीं करतीं और घर पर रहना उन्हें ज्यादा पसंद है।
अपने बचपन के बारे में बात करते हुए दिशा ने बताया था कि स्कूल के दिनों में उनके बाल छोटे थे और वह टॉमबॉय की तरह रहती थीं। उन्हें ‘जादू’ कहकर चिढ़ाया भी जाता था।
आज वही दिशा ग्लैमर, फिटनेस और फिल्मों की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
दिशा पाटनी की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू शायद यही है कि उनकी मंजिल जितनी चमकदार दिखाई देती है, वहां तक पहुंचने का रास्ता उतना ही संघर्षपूर्ण रहा।
500 रुपए लेकर मुंबई आने वाली लड़की ने एक ऑडिशन में असफलता देखी, इंजीनियरिंग छोड़ी, मॉडलिंग से शुरुआत की और फिर ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ के जरिए करोड़ों दर्शकों तक पहुंच बनाई। उनकी कहानी बताती है कि पहला रिजेक्शन अक्सर करियर का आखिरी जवाब नहीं होता।



