The Red Ink
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन में आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के टॉपर्स को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए शिक्षा, अनुशासन, तकनीक के उपयोग और जीवन मूल्यों पर विस्तार से बात की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने छात्राओं के बेहतर प्रदर्शन का जिक्र करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि पहले माना जाता था कि बेटियां घर के कामों में मां का हाथ बंटाती हैं, लेकिन अब लगता है कि लड़के ही घर में झाड़ू-पोछा और दूसरे घरेलू कामों में ज्यादा व्यस्त हैं। शायद यही वजह है कि मेरिट सूची में बेटियां लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
प्रदेशभर के मेधावियों का हुआ सम्मान
राजधानी लखनऊ में आयोजित मुख्य समारोह के साथ-साथ प्रदेश के सभी 75 जिलों में भी सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए गए। राज्य स्तर पर 223 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिनमें छात्राओं की संख्या छात्रों से कहीं अधिक रही। वहीं जिलास्तर पर भी हजारों विद्यार्थियों को सम्मान, प्रमाणपत्र और प्रोत्साहन प्रदान किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। समारोह में यूपी बोर्ड के अलावा सीबीएसई, आईसीएसई और संस्कृत शिक्षा परिषद के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र भी शामिल हुए।
“परीक्षा डराने के लिए नहीं, आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए हो”
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को तनाव देना नहीं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास पैदा करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र ऐसे होने चाहिए जो विद्यार्थियों की समझ और क्षमता को परखें, न कि उन्हें अनावश्यक दबाव में डालें। उन्होंने यह भी कहा कि जो शिक्षक केवल कठिन प्रश्न पूछकर खुद को श्रेष्ठ साबित करने की कोशिश करते हैं, वे शिक्षा के मूल उद्देश्य को नहीं समझते।
छोटे बच्चों को मोबाइल थमाने की आदत पर जताई चिंता
योगी आदित्यनाथ ने अभिभावकों को सलाह देते हुए कहा कि छोटे बच्चों को हर समय मोबाइल फोन देना उनकी रचनात्मकता और मानसिक विकास के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चे रोएं तो उन्हें डिजिटल स्क्रीन के बजाय रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त करने की कोशिश करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार ही बच्चे की पहली पाठशाला होता है और माता-पिता उसके पहले शिक्षक होते हैं।
सोशल मीडिया पर सीमित समय देने की सलाह
छात्रों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन उसमें पूरी तरह डूब जाना भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसी नौकरी या इंटरव्यू में यह नहीं पूछा जाता कि सोशल मीडिया पर कितने फॉलोअर्स हैं। असली पहचान ज्ञान, मेहनत और व्यक्तित्व से बनती है।
नकल संस्कृति पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब प्रदेश की परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते थे। नकल और फर्जी परीक्षार्थियों की घटनाएं आम थीं। लेकिन पिछले वर्षों में व्यवस्था में व्यापक सुधार किए गए हैं, जिसके चलते परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है। उन्होंने दावा किया कि अब लाखों छात्रों की परीक्षाएं तय समय में संपन्न होती हैं और परिणाम भी रिकॉर्ड समय में घोषित किए जा रहे हैं।
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं
योगी आदित्यनाथ ने छात्रों को अतिआत्मविश्वास से बचने की सलाह देते हुए कहा कि जीवन में सफलता केवल मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की इच्छा से मिलती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को कभी यह नहीं मानना चाहिए कि उसे सब कुछ पता है, क्योंकि सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है।
करियर के साथ स्वास्थ्य और समाज सेवा पर भी दिया जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर छात्र का लक्ष्य सिर्फ डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी बनना नहीं होना चाहिए। समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से छुट्टियों का सदुपयोग करने, नियमित दिनचर्या अपनाने, शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने और समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने की अपील की।
शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है। भारतीय परंपरा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को समझना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने छात्रों को जीवनभर सीखते रहने और अपने ज्ञान के द्वार कभी बंद न करने की सलाह दी।




