चलते ई-रिक्शे को एक क्लिक में रोकने वाले चीनी ऐप पर सरकार सख्त, जानिए कैसे हो रहा था पूरा खेल

The Red Ink
दिल्ली समेत देश के कई शहरों में ई-रिक्शा चालकों के लिए परेशानी का कारण बने तीन मोबाइल ऐप्स पर केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने BAT-BMS, Losigy और EPOCH Li-ion जैसे ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इनमें से कुछ ऐप्स गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध थे। हाल के दिनों में कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें कुछ लोग ब्लूटूथ के जरिए चलते हुए ई-रिक्शों की बैटरी बंद करते दिखाई दिए। शुरुआती जांच में सामने आया कि कुछ ई-रिक्शों की लिथियम बैटरियों में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण कोई भी व्यक्ति इन ऐप्स के माध्यम से उनसे कनेक्ट होकर बैटरी डिसेबल कर सकता था।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, आधुनिक लिथियम-आयन बैटरियों में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) लगाया जाता है, जो बैटरी की चार्जिंग, तापमान, वोल्टेज और अन्य तकनीकी जानकारियों पर नजर रखता है। कई बैटरियों में यह सिस्टम ब्लूटूथ के जरिए मोबाइल ऐप से जुड़ जाता है ताकि मालिक या मैकेनिक बैटरी की स्थिति देख सकें। समस्या तब पैदा हुई जब कुछ बैटरियों में यह ब्लूटूथ सिस्टम बिना पासवर्ड या बेहद कमजोर सुरक्षा के साथ छोड़ा गया। ऐसे में कोई भी व्यक्ति करीब 10 से 15 मीटर की दूरी से मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर उसे बंद कर सकता था।

क्या सभी इलेक्ट्रिक वाहन खतरे में हैं?
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा किया जाने लगा कि किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन को मोबाइल ऐप से रोका जा सकता है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा नहीं है। यह खतरा केवल उन्हीं ई-रिक्शों तक सीमित है जिनमें ब्लूटूथ आधारित लिथियम बैटरी लगी है और उसका बीएमएस बिना मजबूत पासवर्ड के खुला छोड़ा गया है। इलेक्ट्रिक कारों, स्कूटरों और बड़े ब्रांड के ई-व्हीकल्स में बैटरी सिस्टम एडवांस सिक्योरिटी, एन्क्रिप्शन और ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित होते हैं। इसलिए सामान्य मोबाइल ऐप उनके सिस्टम तक पहुंच नहीं बना सकते।

आखिर ये ऐप बनाए किसलिए गए थे?
जानकारी के मुताबिक, BAT-BMS जैसे ऐप्स मूल रूप से बैटरी मॉनिटरिंग के लिए विकसित किए गए थे। इनका उद्देश्य सोलर सिस्टम, नावों और अन्य उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम बैटरियों की स्थिति पर नजर रखना था। इन ऐप्स में बैटरी का डिस्चार्ज ऑन-ऑफ करने जैसी सुविधाएं भी रखी गई थीं ताकि जरूरत पड़ने पर बैटरी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया जा सके। लेकिन भारत में कुछ लोगों ने इसी सुविधा का गलत इस्तेमाल करते हुए ई-रिक्शों को चलते-चलते रोकना शुरू कर दिया।

सुरक्षा में चूक कहां हुई?
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या ऐप्स से ज्यादा उन बैटरियों में है जिनके ब्लूटूथ सिस्टम को बिना पासवर्ड के सक्रिय छोड़ दिया गया। सस्ती लिथियम बैटरियां तैयार करने वाले कुछ स्थानीय निर्माता और डीलर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते, जिसके कारण बैटरी किसी भी मोबाइल डिवाइस से आसानी से कनेक्ट हो जाती है। यही कमजोरी शरारती तत्वों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गई।

सरकार के कदम के बाद क्या होगा?
सरकार द्वारा ऐप स्टोर से इन ऐप्स को हटाने का फैसला ऐसे मामलों पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ऐप हटाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। बैटरी निर्माताओं और डीलरों को भी अपने बीएमएस सिस्टम में मजबूत पासवर्ड और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था लागू करनी होगी।

ई-रिक्शा चालकों के लिए जरूरी सलाह
यदि आपके ई-रिक्शे में लिथियम बैटरी लगी है तो सबसे पहले अपने डीलर से जांच कराएं कि उसका ब्लूटूथ सिस्टम पासवर्ड से सुरक्षित है या नहीं। यदि डिफॉल्ट पासवर्ड लगा है तो उसे तुरंत बदल दें। अगर किसी वजह से चलते समय ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाए तो घबराने की बजाय वाहन को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं और बैटरी के मुख्य स्विच (MCB) को ऑफ कर दोबारा ऑन करें। यदि समस्या बनी रहे तो अधिकृत तकनीशियन से संपर्क करें।

Hot this week

‘अब लखनऊ आने के लिए अनुमति नहीं मांगेंगे’, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन पर सीधा हमला

The Red Ink: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने...

Topics

‘अब लखनऊ आने के लिए अनुमति नहीं मांगेंगे’, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन पर सीधा हमला

The Red Ink: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने...

Related Articles

Popular Categories