Chamoli Tunnel Accident में जहां कई कर्मचारी और मजदूर अचानक आए मलबे और पानी की चपेट में आ गए, वहीं दो कर्मचारियों की जान महज एक संयोग की वजह से बच गई। विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में कार्यरत एक ऑपरेटर और एक फोरमैन हादसे से कुछ समय पहले ही टनल से बाहर निकल आए थे। एक मशीन की तकनीकी खराबी और चाय का छोटा सा ब्रेक उनके लिए जीवनदान साबित हुआ।
मशीन में खराबी बनी जीवनरक्षक
परियोजना में लंबे समय से काम कर रहे 36 वर्षीय सुखदेव सिंह ने बताया कि हादसे वाले दिन उनकी कंक्रीट पंप मशीन ठीक तरह से काम नहीं कर रही थी। इसके अलावा काम के लिए जरूरी ग्रेड का सीमेंट भी उपलब्ध नहीं था, जिससे टनल के भीतर काम रुक गया।
सुखदेव के मुताबिक, यदि मशीन सामान्य रूप से चल रही होती तो वह हादसे के समय टनल के अंदर ही मौजूद होते। लेकिन तकनीकी दिक्कत के कारण उन्हें काम रोककर बाहर आना पड़ा।
चाय के बहाने टली बड़ी अनहोनी
टनल से बाहर आने के बाद सुखदेव सिंह ने फोरमैन कुलदीप को चाय पीने के लिए बुला लिया। दोनों बातचीत करते हुए चाय पी रहे थे कि इसी दौरान टनल के भीतर हादसा हो गया।
कुछ मिनटों की यह दूरी दोनों कर्मचारियों के लिए जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन गई। यदि वे उस समय टनल के अंदर होते तो गंभीर खतरे में पड़ सकते थे।
मलबा और पानी आने के बाद मचा हड़कंप
सुखदेव सिंह ने बताया कि अचानक टनल के भीतर मलबा और पानी तेजी से आने लगा। देखते ही देखते वहां अफरा-तफरी मच गई और काम कर रहे कर्मचारियों में दहशत फैल गई।
उन्होंने बताया कि हालात बिगड़ते ही परियोजना में मौजूद कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। कई लोग अपने साथियों को बचाने के लिए तुरंत टनल की ओर दौड़े।
राहत अभियान में जुटे कर्मचारी
हादसे के बाद परियोजना से जुड़े कर्मचारियों ने शुरुआती बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घायलों को बाहर निकालने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का काम तुरंत शुरू किया गया।
सुखदेव के अनुसार, हादसे में घायल हुए कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं और उनका इलाज चल रहा है।
जांच के दायरे में हादसे की वजह
चमोली टनल हादसे के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि टनल में अचानक मलबा और पानी आने की वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।




