The Red Ink
Brij Bhushan Sharan Singh एक बार फिर चर्चा में हैं। महिला पहलवानों से जुड़े यौन शोषण के मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी होने के बाद उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों, लंबी चली कानूनी लड़ाई और अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर खुलकर बात की है।
इस दौरान बृजभूषण शरण सिंह भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्हें सार्वजनिक रूप से ‘रेपिस्ट’ कहा गया, वह उनके लिए बेहद पीड़ादायक था। बृजभूषण के मुताबिक, “इससे अच्छा होता कि सीधे गोली मार देते।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किल दौर के बावजूद उन्होंने कानूनी लड़ाई से पीछे हटने का फैसला नहीं किया।
‘रेपिस्ट कहे जाने का दर्द बहुत बड़ा था’
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों ने उन्हें मानसिक तौर पर काफी प्रभावित किया। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए इस तरह के गंभीर आरोपों का सामना करना आसान नहीं था।
उन्होंने दावा किया कि आरोपों के कारण उनके परिवार पर भी इसका असर पड़ा और उन्हें लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक दबाव झेलना पड़ा। अब अदालत के फैसले के बाद वह खुद को इस पूरे मामले में निर्दोष साबित हुआ मानते हैं।
हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि बृजभूषण के ये बयान उनके अपने पक्ष को सामने रखते हैं। अदालत की कार्यवाही और फैसले में सामने आए तथ्यों को ही मामले का कानूनी आधार माना जाएगा।
दो महिला पहलवानों की गवाही का किया जिक्र
बृजभूषण ने मामले की सुनवाई के दौरान दो महिला पहलवानों की गवाही को बेहद अहम बताया। उनका कहना है कि अदालत में हुई कार्यवाही के दौरान कुछ शिकायतकर्ताओं ने अपने पहले के आरोपों से अलग बातें कहीं।
उन्होंने यह दावा भी किया कि शिकायतकर्ताओं के बीच संपर्क और उनके पते को लेकर अदालत में सवाल उठे थे। बृजभूषण का कहना है कि इन्हीं पहलुओं ने मामले की दिशा बदलने में भूमिका निभाई।
हालांकि, मामले से जुड़े दूसरे पक्ष के आरोप और उनकी कानूनी दलीलें अलग रही हैं। इसलिए बृजभूषण की ओर से लगाए गए आरोपों को उसी रूप में देखा जाना चाहिए।
‘मैं हर तारीख पर अदालत में मौजूद रहा’
बृजभूषण शरण सिंह ने मुकदमे की लंबी सुनवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मामले में कई गवाहों के बयान हुए और बड़ी संख्या में तारीखें पड़ीं।
उनका दावा है कि उन्होंने सुनवाई से बचने की कोशिश नहीं की। बृजभूषण के मुताबिक, वह लगभग हर तारीख पर अदालत में मौजूद रहे और कुछ मौकों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष की ओर से कई बार सुनवाई टालने के लिए समय लिया गया। बृजभूषण का कहना है कि उन्हें शुरू से भरोसा था कि अदालत में मामला टिक नहीं पाएगा।
‘दबदबा नहीं, लोगों का विश्वास है’
अदालत के फैसले के बाद उनके समर्थन में लगाए गए ‘दबदबा है’ जैसे पोस्टरों पर भी बृजभूषण ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने इसे दबदबा कहने से इनकार करते हुए कहा कि यह जनता के साथ उनके लंबे जुड़ाव का परिणाम है। बृजभूषण ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों तक लोगों के बीच रहकर काम किया है और जनता की समस्याओं से जुड़े रहे हैं।
उनके मुताबिक, फैसले के बाद बड़ी संख्या में लोगों का उनसे मिलने पहुंचना इसी राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव को दिखाता है।
संसद में वापसी की इच्छा जाहिर की
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि वह एक बार फिर संसद पहुंचें।
उनके मुताबिक, जिस सदन से वह एक तरह से बेइज्जत होकर बाहर आए थे, उसी सदन में एक बार फिर साफ-सुथरी छवि के साथ लौटना चाहते हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने का अंतिम फैसला पार्टी करेगी। कैसरगंज से दोबारा चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है।
यानी अदालत से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने राजनीति से संन्यास लेने के संकेत नहीं दिए हैं। इसके उलट, उनके बयान से साफ है कि वह आगे भी सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका देख रहे हैं।
‘आरोप सिर्फ मेरे ऊपर नहीं, खेल जगत पर भी असर पड़ा’
बृजभूषण ने पूरे विवाद के असर को खेल जगत से भी जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर की महिला खिलाड़ी इस तरह के आरोप लगाती हैं तो उसका असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता।
उनके मुताबिक, ऐसे मामलों से महिला खिलाड़ियों के परिवारों में भी चिंता पैदा होती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की खेल व्यवस्था को लेकर सवाल उठते हैं। बृजभूषण का कहना है कि अदालत के फैसले के बाद अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है और वह पहले दिन से जिस बात पर कायम थे, वही बात अब सामने आई है।
अब अगली लड़ाई राजनीति के मैदान में?
महिला पहलवान मामले में अदालत से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह का अगला फोकस अब राजनीतिक नजर आ रहा है। उन्होंने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है, लेकिन टिकट और सीट को लेकर फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।
फिलहाल उनके बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी संभावित वापसी की चर्चा जरूर तेज कर दी है। अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर देने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं।
उनके सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह सक्रिय राजनीति में दोबारा बड़ी भूमिका हासिल कर पाएंगे और क्या पार्टी उन्हें चुनावी मैदान में उतारेगी? इसका जवाब आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से ही मिलेगा।




