The Red Ink
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और उनके छोटे भाई प्रतीक यादव के रिश्तों को लेकर हमेशा सियासी गलियारों में चर्चाएं होती रहीं, लेकिन परिवार के करीबी बताते हैं कि दोनों भाइयों के बीच अपनापन कभी कम नहीं हुआ। राजनीति से दूर रहने वाले प्रतीक ने खुद कई बार कहा था कि अखिलेश उनसे ज्यादा समझदार हैं और पार्टी की कमान उन्हीं के हाथ में रहनी चाहिए। फिटनेस, बैडमिंटन, परिवार और निजी रिश्तों के बीच दोनों भाइयों की कहानी हमेशा अलग रही।
श्मशान घाट में दिखा दोनों भाइयों का रिश्ता
लखनऊ के श्मशान घाट पर प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा के दौरान एक भावुक तस्वीर सामने आई। प्रतीक की छोटी बेटी पद्मजा लगातार अखिलेश यादव के पास बैठी रही। वह कभी उन्हें देखकर मुस्कुराती तो कभी चुपचाप उनके पास सिमट जाती। अखिलेश भी उसे दुलारते रहे और चॉकलेट खिलाते नजर आए। यह वही रिश्ता था, जिसे लेकर सालों तक सियासी अटकलें लगती रहीं, लेकिन निजी जीवन में दोनों भाई हमेशा एक-दूसरे के करीब दिखाई दिए।
अलग मां, लेकिन रिश्तों में कभी दूरी नहीं
अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव और उनकी पहली पत्नी मालती देवी के बेटे हैं। वहीं प्रतीक यादव, साधना गुप्ता और उनके पहले पति चंद्र प्रकाश गुप्ता के बेटे थे। साधना और चंद्र प्रकाश के अलग होने के बाद साधना और प्रतीक, मुलायम सिंह के करीब आ गए और बाद में मुलायम ने सार्वजनिक रूप से प्रतीक को अपना बेटा स्वीकार किया। इसके बावजूद परिवार में कभी खुलकर टकराव सामने नहीं आया। परिवार के करीबी बताते हैं कि अखिलेश ने हमेशा प्रतीक को छोटे भाई की तरह ही सम्मान दिया।
मुलायम के सरकारी आवास पर साथ खेलते थे बैडमिंटन
सीनियर पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह बताते हैं कि जब मुलायम सिंह 5, विक्रमादित्य मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे, तब शाम के वक्त अखिलेश और प्रतीक अक्सर साथ में बैडमिंटन खेला करते थे। दोनों भाइयों की फिटनेस को लेकर भी सोच काफी मिलती-जुलती थी। प्रतीक प्रोफेशनल बॉडीबिल्डर थे और लखनऊ में ‘द आयरन कोर’ नाम से जिम चलाते थे। वहीं अखिलेश यादव अपनी साइकिलिंग और फिटनेस के लिए पहचाने जाते हैं। परिवार के लोगों के मुताबिक दोनों के बीच डाइट, एक्सरसाइज और फिटनेस को लेकर लंबी चर्चाएं होती थीं। यही वजह रही कि प्रतीक की तबीयत बिगड़ने के बाद अखिलेश काफी परेशान नजर आए।
जब सपा के उत्तराधिकारी पर बोले थे प्रतीक
समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह के राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर जब चर्चा शुरू हुई थी, तब कई बार प्रतीक यादव का नाम भी सामने आया। लेकिन प्रतीक ने खुद सार्वजनिक तौर पर कहा था कि “अखिलेश भैया मुझसे ज्यादा समझदार हैं और पार्टी की बागडोर उन्हें ही संभालनी चाहिए।” परिवार के करीबी बताते हैं कि जब अखिलेश पढ़ाई पूरी कर ऑस्ट्रेलिया से लौटे थे, तब भी प्रतीक ने पारिवारिक बातचीत में यही बात दोहराई थी।
राजनीति से दूरी, बिजनेस पर पूरा फोकस
यादव परिवार से होने के बावजूद प्रतीक ने खुद को राजनीति से दूर रखा। उन्होंने रियल एस्टेट और फिटनेस सेक्टर में अपना कारोबार खड़ा किया। लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद में उनकी कई कंपनियां थीं। परिवार के लोग कहते हैं कि दोनों भाइयों के बीच एक तरह की अनकही समझ थी—अखिलेश राजनीति संभालेंगे और प्रतीक बिजनेस। अखिलेश ने कभी प्रतीक के कारोबारी फैसलों पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की और प्रतीक ने भी राजनीति में दखल देने से दूरी बनाए रखी।
शादी में दिखी थी परिवार की एकजुटता
2011 में जब प्रतीक यादव की शादी अपर्णा बिष्ट से हुई, तब पूरा यादव परिवार एकजुट नजर आया। शादी में बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और अनिल कपूर जैसी हस्तियां भी शामिल हुई थीं। उस दौरान अखिलेश यादव के बेटे अर्जुन सहबाला बने थे, जबकि डिंपल यादव ने परिवार की बड़ी बहू की भूमिका निभाई थी।
मंच कोई भी हो, दोनों भाइयों ने एक-दूसरे को सम्मान दिया
सैफई महोत्सव हो, परिवार का कोई समारोह या फिर मुलायम सिंह यादव का अंतिम संस्कार—हर मौके पर अखिलेश और प्रतीक साथ दिखाई दिए। मुलायम सिंह के निधन के दौरान दोनों भाइयों की तस्वीरों ने साफ कर दिया था कि परिवार के भीतर रिश्ते अब भी मजबूत हैं। अंतिम संस्कार की रस्मों में दोनों एक-दूसरे का सहारा बने रहे।
अपर्णा के BJP में जाने पर भी रिश्ते नहीं बदले
2017 में अपर्णा यादव ने लखनऊ कैंट सीट से चुनाव लड़ा। इसके बाद 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली। उस समय भी अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि “नेताजी ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन यह उनका व्यक्तिगत फैसला है।” परिवार के करीबी बताते हैं कि अखिलेश ने हमेशा अपर्णा को परिवार की “छोटी बहू” का सम्मान दिया।
सोशल मीडिया पर कम दिखे, लेकिन रिश्ते सामान्य रहे
सियासी चर्चाओं में अक्सर कहा जाता था कि अखिलेश और प्रतीक के रिश्ते उतने करीब नहीं हैं। इसकी एक वजह सोशल मीडिया भी रही, जहां प्रतीक ने शायद ही कभी अखिलेश के साथ तस्वीरें साझा कीं। हालांकि परिवार के लोग कहते हैं कि दोनों भाइयों के रिश्ते पूरी तरह सामान्य थे। बस दोनों ने कभी अपने निजी संबंधों को सार्वजनिक प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनाया।
शिवपाल यादव से बेहद करीब थे प्रतीक
यादव परिवार में अगर कोई नेता प्रतीक के सबसे ज्यादा करीब माना जाता था, तो वह शिवपाल यादव थे। परिवार के लोग बताते हैं कि जब मुलायम सिंह दिल्ली की राजनीति में व्यस्त रहते थे, तब लखनऊ में प्रतीक की परवरिश में शिवपाल की बड़ी भूमिका रही। प्रतीक उन्हें पिता जैसा सम्मान देते थे। सार्वजनिक कार्यक्रमों में अक्सर प्रतीक, शिवपाल के पैर छूते दिखाई देते थे। सीनियर पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह बताते हैं कि प्रतीक की मौत की खबर सुनकर शिवपाल बेहद भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा था कि बचपन से लेकर अब तक की सारी तस्वीरें आंखों के सामने घूम रही हैं।
अपर्णा के चुनाव प्रचार में शिवपाल ज्यादा सक्रिय रहे
2017 के विधानसभा चुनाव में जब अपर्णा यादव लखनऊ कैंट सीट से मैदान में उतरीं, तब शिवपाल यादव उनके प्रचार में काफी सक्रिय नजर आए। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उन्होंने हमेशा प्रतीक और उनके परिवार का समर्थन किया।
लग्जरी कारों के शौक पर भी शिवपाल ने किया बचाव
प्रतीक यादव को महंगी गाड़ियों और सुपरबाइक्स का शौक था। जब विपक्ष और सोशल मीडिया पर उनकी लाइफस्टाइल को लेकर सवाल उठे, तब शिवपाल यादव खुलकर उनके समर्थन में सामने आए। उन्होंने कहा था कि प्रतीक राजनीति में नहीं हैं, वह कारोबारी हैं और उन्हें अपनी पसंद की जिंदगी जीने का पूरा अधिकार है।
मुलायम और साधना की कहानी से जुड़ा है प्रतीक का बचपन
जर्नलिस्ट और लेखक सुनीता ऐरॉन ने अपनी किताब ‘बदलाव की लहर’ में मुलायम सिंह और साधना गुप्ता की रिश्तों की कहानी का जिक्र किया है। उनके मुताबिक मुलायम की मां मूर्ति देवी की बीमारी के दौरान साधना ने उनकी काफी सेवा की थी। यहीं से दोनों करीब आए। साल 1988 के आसपास साधना अपने पहले पति चंद्र प्रकाश गुप्ता से अलग रहने लगीं। उसी दौरान मुलायम ने अखिलेश को साधना और छोटे प्रतीक से मिलवाया।
सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे में स्वीकारा था रिश्ता
2007 में आय से अधिक संपत्ति मामले के दौरान मुलायम सिंह यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि साधना गुप्ता उनकी पत्नी हैं और प्रतीक उनके बेटे हैं। इसके बाद से प्रतीक यादव आधिकारिक तौर पर यादव परिवार का हिस्सा माने जाने लगे।
आखिरी समय तक परिवार से जुड़े रहे प्रतीक
2019 में जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुलायम सिंह को सरकारी बंगला खाली करना पड़ा, तब वह साधना गुप्ता के साथ अंसल गोल्फ सिटी स्थित आवास में रहने लगे थे। प्रतीक भी लगातार परिवार के संपर्क में रहे। राजनीति से दूर रहने के बावजूद उन्होंने हमेशा परिवार की गरिमा और निजी रिश्तों को प्राथमिकता दी।




