The Red Ink: 14 अप्रैल की कैबिनेट बैठक पर टिकी नजरें नए सीएम और डिप्टी सीएम फॉर्मूले पर मंथन तेज….
पटना से दिल्ली तक ‘पावर पॉलिटिक्स’ गरम
बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। अगले दो-तीन दिन सत्ता के समीकरण तय कर सकते हैं। 14 अप्रैल को होने वाली कैबिनेट बैठक को लेकर हलचल तेज है और इसी के साथ मुख्यमंत्री Nitish Kumar के इस्तीफे की अटकलों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। इसी बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan को बिहार के लिए ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है, जो बीजेपी विधायक दल की बैठक में मौजूद रहेंगे।
नई नेतृत्व की तलाश, अंदरखाने तेज मंथन
सूत्रों के अनुसार, संभावित नेतृत्व बदलाव को देखते हुए विधायक दल के नेता के चयन की प्रक्रिया तेज हो गई है। बीजेपी के भीतर नए चेहरे को लेकर चर्चा जारी है, जिसमें Samrat Choudhary एक मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहे हैं। हालांकि, असली सवाल यह है कि क्या जेडीयू इस फॉर्मूले से सहमत होगी? और अगर नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति में सीमित भूमिका लेते हैं, तो पार्टी की कमान किसके हाथ में जाएगी?
जेडीयू का स्टैंड साफ- ‘नीतीश कहीं नहीं जा रहे’
इन अटकलों के बीच जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी में टूट की बात कर रहे हैं, उन्हें अपने घर की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि नीतीश कुमार भले मुख्यमंत्री पद पर रहें या नहीं लेकिन वे बिहार की राजनीति से दूर नहीं होंगे। संजय झा के मुताबिक, नीतीश संसद सत्र में भाग लेंगे, लेकिन बाकी समय बिहार में रहकर अगली सरकार की दिशा तय करेंगे और सरकार उनकी नीतियों पर ही चलेगी।
तेजस्वी के दावे से बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Tejashwi Yadav के उस बयान ने भी सियासी बहस को हवा दी है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहते, तो जेडीयू में टूट हो सकती है। इसी बयान के बाद से सत्ता समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
दो डिप्टी CM फॉर्मूला? नए नाम चर्चा में
जेडीयू के सूत्रों के मुताबिक, इस बार सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए दो डिप्टी सीएम का फॉर्मूला अपनाया जा सकता है। इसमें Vijay Kumar Chaudhary का नाम एक मजबूत दावेदार के तौर पर सामने आ रहा है, जबकि दूसरा बड़ा नाम Nishant Kumar का बताया जा रहा है, जिनकी राजनीतिक एंट्री लगभग तय मानी जा रही है और उन्हें धीरे-धीरे तैयार किया जा रहा है।
14 अप्रैल- फैसले का दिन?
अब सबकी नजरें 14 अप्रैल की कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं। क्या यह नीतीश कुमार के कार्यकाल का आखिरी दिन होगा? या फिर सियासत कोई नया मोड़ लेगी? फिलहाल इतना तय है कि बिहार में सत्ता का अगला अध्याय लिखे जाने की तैयारी पूरी रफ्तार से चल रही है और हर खिलाड़ी अपनी चाल सोच-समझकर चल रहा है।




