Report By: Shreya Shukla
The Red Ink
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का हृदय स्थल हजरतगंज आज फिर से नारों और आक्रोश की गूंज का गवाह बना। अवसर था निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि और शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण के खिलाफ ‘राष्ट्रीय छात्र पंचायत’ का उग्र प्रदर्शन। छात्रों ने गांधी प्रतिमा के पास जुटकर न केवल अपनी आवाज बुलंद की, बल्कि सरकार और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता पर तीखे प्रहार भी किए।
आज के प्रदर्शन की मुख्य वजह
राजधानी के प्राइवेट स्कूलों में हर साल बढ़ा दी जाने वाली भारी-भरकम फीस और छिपे हुए शुल्कों के खिलाफ छात्र पंचायत से जुड़े छात्र शुक्रवार को सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारी छात्रों का स्पष्ट कहना है कि सरकार को पूरे प्रदेश में ‘समान शिक्षा’ के लिए कानून लागू करना चाहिए। केवल एक जिले में जिला प्रशासन द्वारा रोक लगा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा; यह कानून प्रदेश के सभी 75 जिलों में समान रूप से प्रभावी होना चाहिए।
“बादाम खा गए विधायक”- क्या हुआ प्रदर्शन के दौरान?
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय छात्र पंचायत के अध्यक्ष Shivam Pandey ने जनप्रतिनिधियों पर तंज कसते हुए एक हैरान करने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पिछली बार विरोध के स्वरूप उन्होंने प्रदेश के सभी 403 विधायकों को पत्र के साथ दो-दो बादाम भेजे थे। Shivam Pandey ने कहा “हमने बादाम इसलिए भेजे थे ताकि उनकी याददाश्त तेज हो और उन्हें बच्चों के अधिकार याद आएं। विधायक हमारा बादाम तो खा गए, हमारा पैसा भी बेकार हुआ, लेकिन बच्चों के हक के लिए उन्होंने सदन में एक शब्द तक नहीं बोला। वे कुंभकरण की नींद सो रहे हैं।”
संघर्ष की दास्तां: खून से खत और पैदल यात्रा
आज के प्रदर्शन में छात्रों का दर्द साफ झलक रहा था। Shivam Pandey ने बताया कि वह इस मुद्दे को लेकर गोंडा से पैदल चलकर लखनऊ आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को अपने खून से पत्र लिखा, विधानसभा का घेराव किया और यहां तक कि अपना मुंडन भी कराया। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “मेरे मुंडन के बाद बाल दोबारा उग आए लेकिन सरकार की फाइलें अब तक नहीं हिलीं।”
“भारत को नेपाल से सीखना चाहिए”
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पड़ोसी देश Nepal का उदाहरण देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति की मांग की। छात्रों का तर्क था कि नेपाल ने शिक्षा के क्षेत्र में लूट को देखते हुए कड़े कदम उठाए हैं और प्राइवेट स्कूलों के एकाधिकार को चुनौती दी है। भारत सरकार को भी सरकारी स्कूलों को इतना बेहतर बनाना चाहिए कि किसी भी वर्ग के बच्चे को प्राइवेट स्कूल की जरूरत न पड़े। जब तक गांव के प्रधान, विधायक, सांसद और जिलाधिकारी के बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
पुलिस के साथ बातचीत और भविष्य की चेतावनी
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही हजरतगंज कोतवाली से पुलिस बल मौके पर पहुंचा। कोतवाल Vikram Singh ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया, जहां छात्रों ने अपनी मांगों का ज्ञापन और व्यथा सुनाई। छात्रों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल विचार नहीं किया गया, तो अगले महीने यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।
संगठन की मुख्य मांगें
राष्ट्रीय छात्र पंचायत ने आज के प्रदर्शन के माध्यम से सरकार के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखी हैं-
1- सख्त फीस रेगुलेशन बिल: पूरे उत्तर प्रदेश में ‘फीस रेगुलेशन बिल’ को कड़ाई से लागू किया जाए ताकि स्कूल मनमानी फीस न बढ़ा सकें।
2- सिंडिकेट का खात्मा: हर साल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें बदलने के सिंडिकेट और कमीशनखोरी को तुरंत खत्म किया जाए।
3- एनुअल चार्ज पर रोक: स्कूलों द्वारा लिए जाने वाले ‘एनुअल चार्ज’ और अन्य छिपे हुए शुल्कों (Hidden Charges) पर तत्काल प्रतिबंध लगे।
4- कैबिनेट में चर्चा: कैबिनेट की बैठकों में प्राइवेट स्कूलों की फीस और शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष चर्चा की जाए।




