The Red Ink: उत्तर प्रदेश में चुनावी तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई है। अंतिम मतदाता सूची जारी होते ही यह तय हो गया है कि इस बार 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 मतदाता राज्य की सत्ता की दिशा तय करेंगे। इन आंकड़ों ने न सिर्फ संख्या का आकार दिखाया है, बल्कि राजनीतिक रणनीतियों को भी नई दिशा दे दी है।
आंकड़ों में छुपा पूरा चुनावी खेल
नई सूची के मुताबिक प्रदेश में 7,30,71,061 पुरुष मतदाता हैं, जबकि 6,09,09,525 महिलाएं वोट देने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा 4,206 ट्रांसजेंडर मतदाता भी इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यह संतुलन बताता है कि चुनाव सिर्फ संख्या का नहीं, बल्कि हर वर्ग की भागीदारी का भी खेल बनने जा रहा है।
इन जिलों ने बढ़ाया सियासी वजन
अगर बढ़ोतरी की बात करें, तो प्रयागराज ने सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की है, जहां 3,26,421 नए मतदाता जुड़े हैं। वहीं गाजियाबाद भी पीछे नहीं है। विधानसभा स्तर पर साहिबाबाद सीट पर 82,989 नए वोटरों का जुड़ना इसे सबसे चर्चित बना रहा है। शहरों के आंकड़े भी कम दिलचस्प नहीं हैं, लखनऊ में 2,85,961, बरेली में 2,57,921, गाजियाबाद में 2,43,666 और जौनपुर में 2,37,590 मतदाता बढ़े हैं। ये बढ़त आने वाले चुनाव में सीटों का गणित बदल सकती है।

युवा ताकत और बदलता जेंडर संतुलन
इस बार 18 से 19 साल के 17,63,360 नए युवा वोटर जुड़े हैं, जो पहली बार मतदान करेंगे। यही वर्ग चुनावी माहौल को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। साथ ही, जेंडर रेशियो में भी सुधार दर्ज हुआ है। ड्राफ्ट लिस्ट के मुकाबले इसमें 10 अंकों की बढ़ोतरी हुई है और यह अब 834 तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि महिला मतदाताओं की संख्या में 42 लाख से ज्यादा का इजाफा हुआ है, जो सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का संकेत देता है।
166 दिनों की मेहनत से तैयार हुई तस्वीर
इस पूरी प्रक्रिया को तैयार करने में 166 दिन लगे। 27 अक्टूबर से शुरू होकर 6 जनवरी के बाद दो महीनों तक दावे और आपत्तियों का निस्तारण किया गया। इस दौरान करीब 3.26 करोड़ लोगों को नोटिस भेजे गए, जिसके बाद यह अंतिम सूची तैयार हो सकी।
नाम छूटा तो अभी भी रास्ता खुला है
अगर किसी का नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं हो पाया है, तो वह अभी भी फॉर्म-6 के जरिए अपना नाम जुड़वा सकता है। चुनाव आयोग ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध रखे हैं।




