बिजनौर पुलिस की बड़ी चूक: ‘टॉय गन’ समझकर छोड़ा आरोपी, ATS ने खोली आतंकी साजिश की पूरी परत

The Red Ink: उत्तर प्रदेश में एक खतरनाक आतंकी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Uttar Pradesh Anti-Terrorism Squad (ATS) ने लखनऊ से साकिब उर्फ डेविल समेत चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार कर एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

पहले ‘खिलौना’ समझकर छोड़ा गया था आरोपी
यह मामला मेरठ के आकिब खान से जुड़ा है, जो दुबई में बैठकर सोशल मीडिया पर AK-47 लहराते हुए वीडियो बना रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद जांच शुरू हुई लेकिन बिजनौर पुलिस ने गंभीर लापरवाही बरती। जांच के दौरान आरोपी ने दावा किया कि AK-47 सिर्फ प्लास्टिक का खिलौना है, हैंड ग्रेनेड परफ्यूम की बोतल है चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस ने बिना किसी फॉरेंसिक या तकनीकी जांच के इन दावों को सच मान लिया और केस में फाइनल रिपोर्ट लगाकर क्लीन चिट दे दी।

ATS की कार्रवाई से खुला पूरा नेटवर्क
2 अप्रैल को Uttar Pradesh Anti-Terrorism Squad ने लखनऊ से साकिब उर्फ डेविल समेत चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि साकिब का सीधा संपर्क दुबई में बैठे आकिब खान से था। आकिब ने ही उसे पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलर्स से जोड़ा, रेलवे और गैस ट्रकों को निशाना बनाने की साजिश की जा रही थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह गिरोह रेलवे सिग्नल बॉक्स उड़ाने, गैस सिलेंडर से भरे ट्रकों में आग लगाने और कई प्रतिष्ठित संस्थानों की रेकी करने जैसी खतरनाक साजिशों पर काम कर रहा था।

‘गजवा-ए-हिंद’ के नाम पर युवाओं को भड़काया
जांच में यह भी सामने आया कि पाकिस्तानी हैंडलर्स ‘गजवा-ए-हिंद’ और ‘ओसामा बिन लादेन’ जैसे नामों का इस्तेमाल कर युवाओं को भड़का रहे थे। गिरोह आगजनी के वीडियो पाकिस्तान भेजता था बदले में QR Code के जरिए पैसे हासिल करता था। इस नेटवर्क ने गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ में सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाने की पूरी योजना तैयार कर ली थी।

बिजनौर पुलिस पर गिरी गाज
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद बिजनौर पुलिस में हड़कंप मच गया। एसपी बिजनौर Abhishek Jha ने लापरवाही बरतने पर तत्कालीन थाना अध्यक्ष सत्येंद्र मलिक को निलंबित कर दिया है। वहीं, नजीबाबाद के सीओ नितेश प्रताप सिंह को पद से हटाकर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

एक तरफ ATS की सतर्कता ने बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया, तो दूसरी ओर स्थानीय पुलिस की लापरवाही ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो क्या यह नेटवर्क पहले ही पकड़ा जा सकता था?

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