The Red Ink: केंद्र सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को सरल और नागरिकों के लिए कम दंडात्मक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए 80 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें से 717 प्रावधानों को आपराधिक श्रेणी से बाहर किया जाएगा, जबकि बाकी बदलाव प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए किए जा रहे हैं।
सरकार का साफ मकसद है छोटी और प्रक्रियात्मक गलतियों के लिए जेल की सजा खत्म कर, उसकी जगह सिविल पेनल्टी यानी जुर्माना लागू करना, ताकि “डर आधारित शासन” से “भरोसे आधारित शासन” की ओर बढ़ा जा सके।
हाईवे जाम पर अब नहीं होगी जेल
National Highways Act, 1956 में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। पहले इस कानून की धारा 8-बी के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने पर जुर्माने के साथ 5 साल तक की सजा हो सकती थी और एफआईआर भी दर्ज होती थी। लेकिन नए प्रस्ताव के मुताबिक अब जेल की सजा खत्म कर दी गई है ऐसे मामलों को सिर्फ जुर्माने तक सीमित किया जाएगा। इसका मतलब प्रदर्शन या जाम जैसे मामलों में अब सीधे जेल नहीं जाना पड़ेगा।
ट्रैफिक नियम तोड़ने पर भी बदला खेल
Motor Vehicles Act, 1988 और इसके 2019 संशोधन के तहत पहले ट्रैफिक नियम तोड़ने पर कड़ी सजा का प्रावधान था। पुराने नियमों के अनुसार 1,000 से 25,000 रुपये तक जुर्माना, 6 महीने से 3 साल तक की जेल, लाइसेंस सस्पेंड या दोनों सजा एक साथ वहीं अब नए बदलाव के तहत जेल की सजा खत्म होगी सिर्फ जुर्माना ही लगेगा।
क्या बदल रहा है असल में?
यह विधेयक सिर्फ सजा कम करने का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को बदलने का प्रयास है। सरकार का मानना है कि इससे आम नागरिकों पर कानूनी दबाव कम होगा, कारोबार करने में आसानी होगी, छोटी गलतियों पर “क्रिमिनल” टैग नहीं लगेगा।
जन विश्वास बिल 2026 के जरिए सरकार एक बड़ा संदेश देना चाहती है अब हर गलती अपराध नहीं मानी जाएगी। कानून का फोकस सजा से हटकर सुधार और सुविधा की ओर बढ़ रहा है।




