The Red Ink: जहां आमतौर पर तलाक को दुख और टूटन से जोड़ा जाता है, वहीं मेरठ से एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने इस सोच को चुनौती दे दी। यहां एक पिता ने अपनी बेटी के तलाक को हार नहीं, बल्कि नई शुरुआत मानते हुए ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया।
तलाक के बाद जश्न, ढोल-नगाड़े और मिठाइयां
मेरठ में फैमिली कोर्ट से तलाक मंजूर होते ही बेटी प्रणिता के मायके में खुशी का माहौल बन गया। रिटायर्ड जज डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा ने बेटी का स्वागत फूलों की माला पहनाकर किया, मिठाइयां बांटी गईं और ढोल की थाप पर पूरा परिवार झूम उठा।
कचहरी से शुरू हुआ यह जश्न देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
क्या है पूरा मामला?
मेरठ के शास्त्रीनगर निवासी डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा ने साल 2018 में अपनी बेटी प्रणिता की शादी शाहजहांपुर के गौरव अग्निहोत्री से की थी, जो सेना में मेजर हैं और जालंधर में तैनात हैं। प्रणिता का एक बेटा भी है लेकिन समय के साथ ससुराल में उत्पीड़न बढ़ता चला गया। हालात ऐसे बने कि प्रणिता ने तलाक लेने का फैसला कर लिया। मामला फैमिली कोर्ट पहुंचा, जहां दोनों का तलाक मंजूर कर लिया गया।
दर्द से जश्न तक का सफर
तलाक के बाद जहां आमतौर पर मायके में सन्नाटा होता है, वहीं इस परिवार ने इसे बेटी की ‘नई जिंदगी’ की शुरुआत माना।
ढोल बुक किए गए, मिठाइयां मंगाई गईं और पूरे परिवार ने खुशी जाहिर की। यह जश्न सिर्फ एक तलाक का नहीं, बल्कि एक बेटी के सम्मान और उसके नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक बन गया।
पहले भी झेल चुका है परिवार बड़ा दुख
प्रणिता के परिवार पर पहले ही दुखों का पहाड़ टूट चुका था। साल 2022 में एक सड़क हादसे में उनके भाई की मौत हो गई थी, जिसके बाद वह अपने पिता की इकलौती संतान रह गईं। ऐसे में ससुराल में हो रहे उत्पीड़न ने परिवार को और भी झकझोर दिया, लेकिन पिता ने बेटी का साथ नहीं छोड़ा।
पिता का साथ बना ताकत
डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा ने बेटी को हिम्मत दी और तलाक लेने के फैसले में उसका साथ दिया। उनका कहना है कि जिस तरह बेटी के जन्म पर ढोल बजे थे, उसी तरह आज भी उसकी खुशी उतनी ही अहम है। उनके इस कदम ने समाज को एक अलग संदेश दिया है कि बेटी की खुशी किसी भी परंपरा से बड़ी होती है।
बेटी ने क्या कहा?
प्रणिता ने बताया कि उन्होंने अपनी शादी बचाने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि साल 2021 में भी तलाक की स्थिति बनी थी लेकिन हालात नहीं बदले। आखिरकार उन्होंने फैसला लिया और उनके पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि हर लड़की को ऐसा परिवार मिलना चाहिए।
मेरठ की यह कहानी सिर्फ एक तलाक की नहीं, बल्कि सोच में बदलाव की है। जहां समाज तलाक को कलंक मानता है, वहीं इस परिवार ने इसे नई शुरुआत का जश्न बना दिया एक ऐसा संदेश, जो लंबे समय तक याद रखा जाएगा।




