The Red Ink: ईरान में गिराए गए F-15 लड़ाकू विमान के बाद लापता हुए अमेरिकी सैन्य अफसर को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिका ने कहा है कि एक बेहद जोखिम भरे सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए उस अफसर को सुरक्षित ढूंढ निकाला गया है।
ट्रंप का दावा- “इतिहास के सबसे साहसी मिशनों में से एक”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए इस ऑपरेशन की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी सेना ने “इतिहास के सबसे साहसी खोज और बचाव अभियानों में से एक” को अंजाम दिया और लापता अफसर, जो एक कर्नल भी हैं, अब सुरक्षित हैं। ट्रंप के अनुसार, यह अफसर ईरान के खतरनाक पहाड़ी इलाके में दुश्मनों से घिरा हुआ था और हर पल खतरे में था लेकिन अमेरिकी सेना लगातार उसकी लोकेशन ट्रैक कर रही थी।
कैसे चला ऑपरेशन, पूरी जानकारी अब भी साफ नहीं
हालांकि अमेरिका ने यह नहीं बताया कि अफसर को किस तरह खोजा गया लेकिन इस ऑपरेशन से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि दक्षिणी ईरान में बड़े स्तर पर सर्च एंड रेस्क्यू मिशन चलाया गया। बीबीसी के अनुसार, बचाव के दौरान अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच मुठभेड़ की आशंका भी जताई जा रही है। यह भी माना जा रहा है कि पायलट विमान से बाहर निकलते समय घायल हो गया था।
दर्जनों विमान, हाई-टेक हथियार और 24 घंटे निगरानी
ट्रंप ने दावा किया कि उनके आदेश पर अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान तैनात किए, जो अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। उन्होंने कहा कि अफसर को चोटें आई हैं लेकिन वह जल्द ठीक हो जाएगा। यह ऑपरेशन पहले किए गए एक गुप्त मिशन के बाद अंजाम दिया गया, जिसे सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक नहीं किया गया था।
“किसी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ेंगे”
अमेरिकी अधिकारियों ने इस मिशन को सेना के मूल सिद्धांत “किसी को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा” का उदाहरण बताया। मध्य पूर्व के लिए डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस मिक मुलरॉय ने कहा कि इस ऑपरेशन में शामिल सभी एजेंसियां और सैनिक देश की सराहना के हकदार हैं।
ईरान का दावा- अमेरिकी ड्रोन मार गिराया
दूसरी ओर, ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सर्च ऑपरेशन के दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया। बताया गया कि यह ड्रोन दक्षिणी इस्फहान प्रांत में गिरा। हालांकि, इस दावे की अमेरिका की ओर से अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
अगर पकड़ा जाता अफसर, तो बढ़ सकता था तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह लापता अफसर ईरान के कब्जे में चला जाता, तो इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता था। इतिहास में ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जैसे 1979 में ईरान द्वारा अमेरिकी राजनयिकों को 444 दिन तक बंधक बनाए रखना, या 2014 में एक अमेरिकी सैनिक को छुड़ाने के बदले तालिबान कैदियों की रिहाई।
F-15 गिरना अमेरिका के लिए झटका
F-15 ईगल जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान का गिराया जाना अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि ट्रंप और अमेरिकी रक्षा मंत्री पहले ईरान पर “हवाई बढ़त” का दावा कर चुके थे लेकिन इस घटना से संकेत मिलता है कि ईरान अब भी अपनी हवाई सीमा की रक्षा करने में सक्षम है, भले ही सीमित स्तर पर क्यों न हो। अमेरिका के इस दावे ने जहां उसकी सैन्य क्षमता को दिखाने की कोशिश की है, वहीं ईरान के जवाबी दावों ने इस पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे संभव हैं।




