The Red Ink: आईपीएल का रोमांच, हजारों दर्शकों की भीड़ और उसी शोर के बीच चुपचाप गायब होते मोबाइल फोन, बेंगलुरु के स्टेडियम में जो हुआ, वह सिर्फ चोरी नहीं बल्कि एक सुनियोजित अपराध की कहानी है। Bengaluru Police ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें नाबालिगों को खास ट्रेनिंग देकर मैदान में उतारा गया था।
मैच के दौरान ‘गायब’ होते फोन
28 मार्च को Royal Challengers Bengaluru और Sunrisers Hyderabad के बीच खेले गए मुकाबले में कई दर्शकों के मोबाइल फोन चोरी हो गए। शुरुआत में यह सामान्य चोरी लग रही थी लेकिन शिकायतें बढ़ीं तो मामला बड़ा होता चला गया।
फ्लाइट और ट्रेन से बुलाए गए ‘चोर’
जांच में सामने आया कि यह कोई आम गिरोह नहीं था। आरोप है कि देश के अलग-अलग हिस्सों, खासकर झारखंड और बिहार से नाबालिगों को ट्रेनों और फ्लाइट के जरिए बेंगलुरु बुलाया गया। इनका मकसद सिर्फ एक था भीड़ का फायदा उठाकर मोबाइल उड़ाना और बिना शक के निकल जाना।
नाबालिगों को दी गई ‘क्राइम ट्रेनिंग’
सूत्रों के मुताबिक, इन नाबालिगों को जेब काटने की तकनीक से लेकर पुलिस से बचने तक की पूरी ट्रेनिंग दी गई थी। उन्हें यह भी सिखाया गया था कि अगर पकड़े जाएं तो क्या कहना है, पूछताछ में कैसे जवाब देना है और Juvenile Justice Board के सामने कैसे पेश आना है। यानी यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि पूरी स्क्रिप्ट के साथ किया गया अपराध था।
टिकट भी चोरी, एंट्री भी ‘प्लान्ड’
गिरोह के कुछ सदस्यों ने कथित तौर पर मैच के टिकट भी चोरी किए, ताकि स्टेडियम में एंट्री मिल सके। भीड़ के बीच घुसकर ये नाबालिग तेजी से मोबाइल साफ करते और बिना शक के निकल जाते थे।
75 मोबाइल बरामद, 13 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में 13 लोगों को पकड़ा है, जिनमें 9 नाबालिग शामिल हैं। अब तक 75 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं जिसमे से 70 चोरी के और 5 गैंग के इस्तेमाल के लिए थे। चार आरोपियों शभम कुमार, ईशल कुमार, संजीत कुमार और सोहन कुमार को अदालत में पेश कर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि नाबालिगों को सुधार गृह भेजा गया है।
बड़ा नेटवर्क होने का शक
पुलिस को शक है कि यह गिरोह देश के कई शहरों में सक्रिय एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। इस पूरे ऑपरेशन को सेंट्रल डिवीजन के DCP अक्षय एम. हाके और उनकी टीम ने अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
आईपीएल के शोर और भीड़ के बीच चल रहा यह ‘मोबाइल हंट’ दिखाता है कि अपराध अब कितनी प्लानिंग और तकनीक के साथ किया जा रहा है। सवाल यह है क्या भीड़भाड़ वाले बड़े इवेंट्स अब अपराधियों के लिए आसान निशाना बनते जा रहे हैं?




