रूस पर यूक्रेन का पलटवार तेज: मार्च 2026 में 334 वर्ग किमी इलाका वापस, ड्रोन युद्ध बना गेमचेंजर

The Red Ink: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मार्च 2026 में यूक्रेन ने बड़ा पलटवार करते हुए 334 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा इलाके पर फिर से कब्जा कर लिया है। इसी के साथ, यूक्रेन ने रूस की बढ़त की रफ्तार को भी पिछले तीन महीनों में आधा कर दिया है।

ड्रोन बने यूक्रेन की सबसे बड़ी ताकत
यूक्रेन ने बीते एक हफ्ते में रूस की ऑयल एक्सपोर्ट क्षमता को निशाना बनाया है, वहीं जमीनी स्तर पर उसकी सेना ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। यूक्रेन के कमांडर-इन-चीफ जनरल ओलेक्ज़ेंडर सिरस्की के मुताबिक, ड्रोन निर्माण की क्षमता इस युद्ध में निर्णायक साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि मार्च में ड्रोन इंटरसेप्टर की कॉम्बैट उड़ानों और नष्ट किए गए टारगेट्स की संख्या फरवरी के मुकाबले करीब 55% बढ़ गई।

FPV ड्रोन से रूस को भारी नुकसान
यूक्रेन ने फर्स्ट पर्सन व्यू (FPV) ड्रोन के जरिए रूसी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया है। 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से ही यूक्रेन ड्रोन वॉरफेयर इनोवेशन का केंद्र बन चुका है।

ग्लोबल लेवल पर बढ़ी यूक्रेन की पकड़
राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कई खाड़ी देशों के साथ समझौते किए हैं, जिनके तहत यूक्रेन ड्रोन टेक्नोलॉजी साझा करेगा और बदले में संयुक्त ड्रोन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। ज़ेलेंस्की ने बताया कि सऊदी अरब, यूएई और कतर के साथ समझौते हो चुके हैं, जबकि जॉर्डन, कुवैत, इराक और बहरीन के साथ भी बातचीत जारी है। इन देशों की दिलचस्पी आधुनिक खतरों से निपटने के लिए ड्रोन डिफेंस सिस्टम बनाने में है।

जमीन पर भी मिली बड़ी कामयाबी
26 मार्च को यूक्रेन की एयर असॉल्ट फोर्स ने डोनेट्स्क और निप्रोपेत्रोव्स्क सीमा के पास रूसी बढ़त को रोकते हुए बेरेज़ोव गांव को मुक्त कराने का दावा किया। सिरस्की के मुताबिक, इस साल अब तक यूक्रेन कुल 470 वर्ग किलोमीटर इलाका वापस ले चुका है, जो 2023 के बाद पहली बड़ी क्षेत्रीय बढ़त है।

ISW रिपोर्ट में भी पुष्टि
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) के आंकड़ों के अनुसार, यूक्रेनी सेना ने 334.06 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को मुक्त कराया है। हालांकि, संस्था ने माना है कि उसकी मैपिंग पद्धति यूक्रेन की वास्तविक बढ़त को कम आंक सकती है।

यूक्रेन ने साफ कर दिया है कि यह युद्ध अब सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और खासकर ड्रोन के दम पर लड़ा जा रहा है। रूस की बढ़त को धीमा करना और कब्जा वापस लेना इस बात का संकेत है कि जंग अभी लंबी और और भी घातक हो सकती है।

Hot this week

‘अब लखनऊ आने के लिए अनुमति नहीं मांगेंगे’, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन पर सीधा हमला

The Red Ink: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने...

Topics

‘अब लखनऊ आने के लिए अनुमति नहीं मांगेंगे’, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन पर सीधा हमला

The Red Ink: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने...

Related Articles

Popular Categories