NASA Moon Mission: करीब आधी सदी बाद एक बार फिर इंसान चांद की ओर लौटने जा रहा है। 1972 के बाद पहली बार NASA अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के मिशन पर भेजने जा रहा है। Artemis II सिर्फ एक उड़ान नहीं बल्कि भविष्य में चांद पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी की नींव माना जा रहा है।
क्या है Artemis II मिशन?
अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA अपने Artemis II मिशन को लॉन्च करने की तैयारियों में जुटी है। इसे 1 अप्रैल को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह मिशन चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर 10 दिन की यात्रा पर ले जाएगा। हालांकि यह मिशन चांद की सतह पर लैंडिंग नहीं करेगा बल्कि उसके चारों ओर चक्कर लगाकर वापस लौटेगा।
कौन हैं इस ऐतिहासिक मिशन के चार यात्री?
इस मिशन में शामिल चार अंतरिक्ष यात्री हैं- रीड वाइजमैन (नेवी टेस्ट पायलट), विक्टर ग्लोवर (मिशन कमांडर, अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति), क्रिस्टीना कोच (टीम की तीसरी सदस्य), जेरेमी हैनसेन (कैनेडियन स्पेस एजेंसी के फाइटर पायलट) ये NASA के बाहर के पहले अंतरिक्ष यात्री जो चांद मिशन का हिस्सा हैं।
10 दिन, 6 लाख मील की यात्रा
यह मिशन करीब 10 दिनों का होगा और लगभग 600,000 मील (965,600 किलोमीटर) की दूरी तय करेगा। अंतरिक्ष यात्री Orion अंतरिक्ष यान और Space Launch System रॉकेट में उड़ान भरेंगे, ये वही सिस्टम हैं जिन्हें बनाने में NASA ने दो दशक और 40 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं।
मिशन का असली मकसद क्या है?
Artemis II एक टेस्ट फ्लाइट है यह चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा बल्कि Artemis III के लिए रास्ता तैयार करेगा, Artemis III से उम्मीद है कि वह चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंड करेगा जो अब तक काफी हद तक अछूता इलाका माना जाता है।
चांद पर रहना, मंगल की तैयारी
Artemis प्रोग्राम का मुख्य लक्ष्य है इंसान चांद पर कैसे लंबे समय तक रह सकता है, वहां काम करने की तकनीक कैसे विकसित हो इसके साथ ही मंगल ग्रह की लंबी यात्राओं के लिए तैयारी। NASA के मुताबिक, यह मिशन भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की बुनियाद तय करेगा।
Apollo से Artemis तक का सफर
1960-70 के दशक में Apollo मिशनों ने इतिहास रचा था, जब इंसान पहली बार चांद पर पहुंचा। अब Artemis प्रोग्राम उसी विरासत को आगे बढ़ा रहा है लेकिन इस बार लक्ष्य सिर्फ चांद पर जाना नहीं बल्कि वहां ठहरना है।
Artemis II में क्या-क्या टेस्ट होगा?
इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री कई अहम सिस्टम्स की टेस्टिंग करेंगे SpaceX और Blue Origin के लूनर लैंडर्स के साथ डॉकिंग, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, कम्युनिकेशन सिस्टम। हालांकि ये टेस्ट पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में होंगे, जो 100 से 1,200 मील (160 से 2,000 किलोमीटर) की ऊंचाई पर स्थित है।
2028 में चांद पर लैंडिंग का लक्ष्य
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहली लैंडिंग का लक्ष्य अब 2028 रखा गया है। यह देरी जानबूझकर की गई है ताकि तेज़ी के बजाय भरोसेमंद और लंबे समय तक काम करने वाले सिस्टम विकसित किए जा सकें।
Artemis I से Artemis II तक
Artemis I बिना क्रू वाला मिशन था, जिसे 2022 में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अब Artemis II इंसानों के साथ अगला बड़ा कदम है।
‘वापसी’ नहीं, नई शुरुआत
NASA का यह मिशन सिर्फ चांद पर वापसी नहीं है यह अंतरिक्ष में इंसानों के अगले युग की शुरुआत है। Apollo ने दिखाया था कि इंसान चांद तक पहुंच सकता है, Artemis यह साबित करने जा रहा है कि इंसान वहां रह भी सकता है।




