Kanpur: IIT कानपुर में लगातार सामने आए छात्र आत्महत्या के मामलों ने संस्थान को सख्त और असामान्य कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। पिछले 25 महीनों में 9 छात्रों की आत्महत्या ने न सिर्फ संस्थान की व्यवस्था, बल्कि देशभर के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इसी दबाव के बीच IIT कानपुर ने तकनीकी, मनोवैज्ञानिक और संरचनात्मक स्तर पर कई बड़े बदलाव शुरू किए हैं।
पंखों में सेंसर, पाइप हटे ‘रिस्क कम करने’ की कोशिश
सबसे चर्चित कदम हॉस्टल कमरों में स्प्रिंग-लोडेड सीलिंग फैन लगाने का है। इन पंखों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि तय सीमा से ज्यादा वजन पड़ते ही पंखा नीचे झुक जाएगा साथ ही अलार्म बजने लगेगा इसके अलावा कमरों से कपड़े सुखाने वाले पाइप हटाए जा रहे हैं। पहले चरण में हॉल 1 से 3 के करीब 1500 कमरों में यह बदलाव लगभग पूरा हो चुका है। संस्थान की योजना इसे सभी 14 हॉस्टलों में लागू करने की है। संस्थान के निदेशक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल के मुताबिक, यह कदम बाहरी विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर उठाया गया है और इसका मकसद “जोखिम कम करना” है।

मेंटल हेल्थ पर फोकस: नया सेंटर और 24×7 काउंसलिंग
तकनीकी बदलावों के साथ-साथ संस्थान ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया है। ‘सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड वेलबीइंग (CMHW)’ की स्थापना यहां 10 मनोवैज्ञानिक, 1 मनोचिकित्सक और 3 विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात ‘YourDOST’ प्लेटफॉर्म के जरिए 24×7 ऑनलाइन काउंसलिंग, संस्थान का मानना है कि कई छात्र अपनी समस्याएं सीधे साझा नहीं कर पाते, इसलिए उन्हें एक “न्यूट्रल स्पेस” देना जरूरी है।
छात्रों की प्रतिक्रिया: समर्थन भी, सवाल भी
कैंपस में इन कदमों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ छात्र नेताओं का कहना है कि यह कदम जरूरी हैं लेकिन कई छात्र इन्हें “पर्याप्त नहीं” मानते एक छात्र के अनुसार “समस्या सिर्फ पंखों या स्ट्रक्चर की नहीं बल्कि दबाव, प्रतिस्पर्धा और संवाद की कमी की है।”
गाइड-स्टूडेंट संबंध बना बड़ा मुद्दा
कई मामलों में खासकर पीएचडी छात्रों ने अपने गाइड के साथ संवाद की कमी, मानसिक दबाव, असहज माहौल की शिकायत की है। अब संस्थान शिकायत निवारण तंत्र मजबूत कर रहा है बाहरी विशेषज्ञों की मदद से विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहा है।
विरोध और जांच समिति
हाल की घटनाओं के बाद कैंपस में विरोध प्रदर्शन हुए प्रशासन का घेराव किया गया मोमबत्ती मार्च निकाले गए। इसके बाद संस्थान ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई, जिसकी अध्यक्षता डॉ. धनंजय कुमार कर रहे हैं। समिति छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं समझ रही है।
नींद पर रिसर्च: ‘मेंटल हेल्थ सिर्फ दिमाग का मुद्दा नहीं’
एक अलग पहल के तहत संस्थान अब छात्रों की नींद और हॉस्टल माहौल पर भी रिसर्च कर रहा है। प्रो. अनुभा गोयल के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में 500+ छात्रों पर सर्वे किया गया करीब 70% छात्रों ने खराब नींद की शिकायत की जिसका मुख्य कारण गर्मी और उमस, खराब वेंटिलेशन, बंद खिड़कियां बताया।
कमरों में सेंसर, स्मार्टवॉच से ट्रैकिंग
रिसर्च के अगले चरण में कमरों में सेंसर लगाए गए हैं तापमान, नमी और वेंटिलेशन रिकॉर्ड किया जा रहा है, छात्रों को स्मार्टवॉच दी गई हैं, उनकी नींद के पैटर्न को ट्रैक किया जा रहा है इस डेटा से यह समझने की कोशिश हो रही है कि वातावरण और मानसिक स्वास्थ्य का क्या संबंध है।
IIT कानपुर के ये कदम दिखाते हैं कि अब संस्थान सिर्फ अकादमिक प्रदर्शन नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, नींद और माहौल को भी गंभीरता से लेने लगे हैं लेकिन बड़ा सवाल अभी भी कायम है क्या पंखों में सेंसर और काउंसलिंग उस गहरे दबाव और सिस्टम की खामियों को दूर कर पाएंगे जिसकी वजह से छात्र इस हद तक पहुंच रहे हैं?




