Economic Reservation Demand पर मायावती का तीखा बयान…
Economic Reservation Demand को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सदियों से जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करते रहे हैं, इसलिए आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई मांग उचित नहीं है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि संविधान निर्माताओं ने सामाजिक और जातिगत अन्याय को दूर करने के लिए आरक्षण की व्यवस्था बनाई थी। ऐसे में आरक्षण के मूल उद्देश्य को बदलने की कोशिश संविधान की भावना के खिलाफ है।
Economic Reservation Demand पर राहुल गांधी को भी घेरा
Economic Reservation Demand के मुद्दे पर मायावती ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में थाने के बाहर धरने पर बैठने वाले राहुल गांधी जंतर-मंतर पर चल रहे आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को खत्म कराने नहीं पहुंचे।
मायावती ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश तक नहीं की, जिससे कांग्रेस की आरक्षण विरोधी मानसिकता उजागर होती है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख हमेशा से स्पष्ट नहीं रहा है।
दलितों और पिछड़ों के लिए संवैधानिक सुरक्षा है आरक्षण
Economic Reservation Demand संविधान की भावना के खिलाफ: मायावती…
बसपा प्रमुख ने कहा कि आरक्षण किसी आर्थिक सहायता योजना का नाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और जातिगत उत्पीड़न के खिलाफ संवैधानिक सुरक्षा कवच है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने आरक्षण की व्यवस्था उन वर्गों को अवसर देने के लिए बनाई थी, जिन्हें सदियों तक शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान से वंचित रखा गया। इसलिए Economic Reservation Demand को आरक्षण के मौजूदा ढांचे के विकल्प के रूप में नहीं देखा जा सकता।
आरक्षण नहीं, भ्रष्टाचार और व्यवस्था की विफलता है गरीबी की वजह
मायावती ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें हर साल गरीबी उन्मूलन के लिए बड़े बजट का प्रावधान करती हैं। यदि उसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा है तो इसके लिए भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता जिम्मेदार है, न कि आरक्षण व्यवस्था।
उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि “जातिवाद का त्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है” और सामाजिक असमानता खत्म किए बिना समान अवसर की बात अधूरी है।
आरक्षण विरोधी ताकतों को संरक्षण न देने की अपील
बसपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे आरक्षण विरोधी तत्वों को किसी भी प्रकार का संरक्षण न दें। उन्होंने राजनीतिक दलों से भी कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति से बचना चाहिए।
मायावती का कहना है कि सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने के बजाय संविधान की मूल भावना के अनुरूप समाधान तलाशना चाहिए।
‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के बाद तेज हुई बहस
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 अगस्त को आयोजित ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के बाद Economic Reservation Demand को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था का विरोध करते हुए आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग उठाई थी।
आंदोलन के दौरान यूजीसी के कुछ नियमों और आरक्षण नीति में बदलाव की मांग भी की गई। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने विशेष इंतजाम किए थे और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया था।
राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा बयान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Economic Reservation Demand का विरोध कर मायावती अपने पारंपरिक दलित, पिछड़े और वंचित वोट बैंक को मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं। सामाजिक न्याय और आरक्षण हमेशा से बसपा की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और ऐसे मुद्दों पर पार्टी खुलकर अपना पक्ष रखती रही है।




