Justice Yashwant Varma Cash Case: जस्टिस वर्मा पर लगे तीनों आरोप साबित, जांच समिति ने कहा- कैश का नहीं दे पाए संतोषजनक जवाब

Justice Yashwant Varma Cash Case में बुधवार, 12 अगस्त को बड़ा अपडेट सामने आया है। जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच कर रही संसदीय समिति की रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दी गई। रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना गया है। समिति ने कहा कि उनके सरकारी आवास के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में ₹500 के नोट मिलने, महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित नहीं रखे जाने और जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण से जुड़े आरोप जांच में साबित हुए।

समिति ने यह भी कहा कि जस्टिस वर्मा और उनके परिवार का उस स्टोररूम पर “tacit or active control” था और उनके खिलाफ साबित हुआ कदाचार इतना गंभीर है कि उनके खिलाफ पद से हटाने की कार्यवाही शुरू किए जाने का आधार बनता है। हालांकि, रिपोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि नकदी को व्यक्तिगत रूप से हटाने का जस्टिस वर्मा के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला।

क्या है पूरा कैश कांड?

मामला 14 मार्च 2025 की रात का है। दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद राहत और दमकल अभियान के दौरान स्टोररूम में जले और अधजले ₹500 के नोट मिलने की बात सामने आई थी। उस समय वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के जज थे।

घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से इन-हाउस जांच हुई और बाद में संसद में उनके खिलाफ जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

पहला आरोप: स्टोररूम में बड़ी मात्रा में कैश

संसदीय समिति ने पाया कि जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में ₹500 के नोट मौजूद थे। जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों में जले और अधजले नोटों के साथ बड़ी मात्रा में करेंसी देखे जाने की बात सामने आई।

हालांकि, मौके पर नकदी की तत्काल गिनती नहीं की गई और पर्याप्त मात्रा में नोटों को सुरक्षित भी नहीं रखा गया। इस वजह से समिति के सामने वहां मौजूद कुल रकम का सटीक आंकड़ा तय करने में मुश्किल रही। सबसे अहम बात यह रही कि जस्टिस वर्मा कैश की मौजूदगी, स्रोत और मालिकाना हक को लेकर समिति को संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए नतीजन पहला आरोप साबित।

दूसरा आरोप: सबूतों को सुरक्षित नहीं रखा गया

जांच समिति ने पाया कि आग बुझने के बाद घटनास्थल पर मिले महत्वपूर्ण सबूतों को उचित तरीके से सुरक्षित नहीं रखा गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्टोररूम को तत्काल सुरक्षित करने की प्रक्रिया में गंभीर कमियां रहीं और वहां मौजूद सामग्री को हटाए जाने की बात भी जांच में सामने आई।

समिति ने माना कि इस वजह से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्यों की स्थिति प्रभावित हुई और उन्हें संरक्षित करने में गंभीर लापरवाही हुई नतीजन दूसरा आरोप भी साबित।

तीसरा आरोप: जवाब को समिति ने माना अधूरा और भ्रामक

तीसरा आरोप जस्टिस वर्मा की ओर से कैश की मौजूदगी और उसके स्रोत को लेकर दिए गए जवाबों से जुड़ा था। जांच के दौरान जस्टिस वर्मा ने नकदी से अपने संबंध से इनकार किया और इसे साजिश का हिस्सा बताया।

लेकिन समिति के मुताबिक, इन दावों के समर्थन में पर्याप्त ठोस सबूत नहीं मिले। समिति ने उनके स्पष्टीकरण को evasive, incomplete और misleading यानी टालमटोल वाला, अधूरा और भ्रामक माना नतीजन तीसरा आरोप भी साबित हुआ।

आज संसद में क्यों अहम है रिपोर्ट?

इस मामले में जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट मई 2026 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दी थी। इसके बाद रिपोर्ट को संसद में रखने की प्रक्रिया शुरू हुई। मंगलवार को जानकारी सामने आई थी कि रिपोर्ट 12 अगस्त को लोकसभा में पेश की जाएगी और बुधवार को इसे सदन के सामने रखा गया।

आज रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में एक नया महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है। समिति के निष्कर्षों के आधार पर अब संसद में आगे की कार्रवाई का रास्ता तय होगा।

अप्रैल 2026 में इस्तीफा दे चुके हैं जस्टिस वर्मा

जस्टिस यशवंत वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को तत्काल प्रभाव से न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया था। उस समय उनके खिलाफ संसदीय जांच की प्रक्रिया चल रही थी।

अब जांच समिति द्वारा तीनों आरोप साबित माने जाने के बाद यह मामला न्यायपालिका में जवाबदेही और न्यायिक आचरण को लेकर बेहद अहम घटनाक्रम बन गया है।

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories