जौहर यूनिवर्सिटी पर अखिलेश यादव का हमला, बोले- सरकार की मंशा शुरू से ठीक नहीं; अब शिक्षण संस्थान पर हथौड़ा चलाना चाहती है

The Red Ink:

रामपुर में 38 इमारतों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक, यूनिवर्सिटी प्रशासन की अपील के बाद हुआ फैसला…

रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा है। रविवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सरकार की मंशा शुरुआत से ही ठीक नहीं रही।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा से जुड़े संस्थानों को आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें नुकसान पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद विश्वविद्यालय नहीं बना पाए, वे अब एक स्थापित शिक्षण संस्थान के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते हैं।

‘लोग पढ़ें, आगे बढ़ें और रोजगार के अवसर बनें, यह सरकार को मंजूर नहीं’

अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य लोगों को पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने का अवसर देना है। शिक्षा के जरिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सरकार का रुख शुरू से ही सकारात्मक नहीं रहा। सपा अध्यक्ष के मुताबिक, सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में नए संस्थान विकसित करने चाहिए, लेकिन इसके उलट मौजूदा विश्वविद्यालय पर कार्रवाई की कोशिश की जा रही है।

अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार खुद कोई विश्वविद्यालय नहीं बना पाई और अब जौहर यूनिवर्सिटी पर “हथौड़ा चलाने” की तैयारी कर रही है।

38 इमारतों पर प्रस्तावित कार्रवाई फिलहाल रुकी

जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद 38 इमारतों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी गई है।

यह आदेश मुरादाबाद मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने दिया है। वे रामपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से रामपुर विकास प्राधिकरण के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की गई थी। इस अपील पर सुनवाई के बाद मंडलायुक्त ने प्रस्तावित कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला किया।

यूनिवर्सिटी प्रशासन की अपील के बाद आया फैसला

स्थानीय पत्रकार मुजस्सिम खान के अनुसार, रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से की गई कार्रवाई के आदेश को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने चुनौती दी थी।

अपील पर सुनवाई के दौरान मामले के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया, जिसके बाद 38 इमारतों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी गई।

हालांकि, यह रोक अंतरिम है और मामले में आगे की सुनवाई तथा प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद अगला फैसला लिया जाएगा।

जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर फिर तेज हुई सियासत

अंतरिम रोक के फैसले के बाद जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। अखिलेश यादव के बयान के बाद समाजवादी पार्टी और सरकार के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

सपा लगातार जौहर यूनिवर्सिटी को शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्थान बताती रही है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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