मायावती का अशोक सिद्धार्थ पर बड़ा एक्शन, भतीजे आकाश आनंद के ससुर को बसपा से निकाला; कहा- अब कभी नहीं होगी वापसी

The Red Ink:

बार-बार चेतावनी के बाद भी रवैये में सुधार न होने का आरोप, यूपी वापसी की खबरें फैलाने पर भी जताई नाराजगी…

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर डॉ. अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया है। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित करते हुए स्पष्ट कर दिया कि उन्हें भविष्य में दोबारा बसपा में शामिल नहीं किया जाएगा।

मायावती ने आरोप लगाया कि कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद अशोक सिद्धार्थ के व्यवहार में सुधार नहीं आया। उन्होंने यह भी कहा कि सभी जिम्मेदारियां हटाए जाने के बाद अशोक सिद्धार्थ से जुड़ी यूपी वापसी की खबरें फैलाकर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई। इसी के बाद उन्हें पार्टी से पूरी तरह बाहर करने का फैसला लिया गया।

रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से बाहर किया गया

अशोक सिद्धार्थ के साथ ही बसपा ने रणधीर सिंह बेनीवाल के खिलाफ भी कार्रवाई की है। उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

बेनीवाल बसपा कोऑर्डिनेटर के तौर पर पंजाब के अलावा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पार्टी नेतृत्व ने अब इन राज्यों में संगठनात्मक व्यवस्था में बदलाव किया है।

दो साल में दूसरी बार अशोक सिद्धार्थ पर कार्रवाई

पिछले दो वर्षों में यह दूसरा अवसर है, जब मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर किया है। इससे पहले 12 फरवरी 2025 को संगठन में गुटबाजी के आरोपों के बीच उन्हें बसपा से निष्कासित किया गया था।

हालांकि, करीब छह महीने बाद सितंबर 2025 में उनकी पार्टी में वापसी हो गई थी। इसके बाद उन्हें फिर से अहम जिम्मेदारियां सौंपी गईं और फरवरी 2026 में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में उन्हें प्रमुख स्थान भी दिया गया।

फिलहाल अशोक सिद्धार्थ तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली के संगठनात्मक कामकाज की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। शनिवार को मायावती ने उन्हें इन सभी राज्यों के प्रभार से मुक्त कर दिया था।

इसके बाद उनके उत्तर प्रदेश में सक्रिय भूमिका मिलने की चर्चाएं सामने आईं। मायावती ने इन खबरों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी सूचनाएं फैलाकर पार्टी कार्यकर्ताओं को भ्रमित करने की कोशिश की गई।

मायावती ने X पर बताई कार्रवाई की वजह

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बार-बार चेतावनी देने के बाद भी अशोक सिद्धार्थ के रवैये में सुधार नहीं हुआ। इसी कारण एक दिन पहले उनसे सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियां वापस ले ली गई थीं।

बसपा प्रमुख के मुताबिक, इसके बावजूद यूपी लौटने से जुड़ी खबरें फैलाकर कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे पार्टी के भीतर साजिश का हिस्सा बताते हुए अशोक सिद्धार्थ को पूरी तरह निष्कासित करने का फैसला किया।

रामजी गौतम को फिर मिली पंजाब की जिम्मेदारी

संगठनात्मक फेरबदल के तहत राज्यसभा सांसद रामजी गौतम को एक बार फिर पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया है। मायावती ने कहा कि वे आगामी पंजाब विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक इस जिम्मेदारी को संभालेंगे।

वहीं, मध्य प्रदेश के प्रभारी राजाराम को दिल्ली, केरल, गुजरात और कर्नाटक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। मायावती ने यह भी तय किया है कि उत्तर प्रदेश के रहने वाले ऐसे पदाधिकारी या कोऑर्डिनेटर, जो दूसरे राज्यों में महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, उन्हें यूपी में पार्टी की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

कार्यकर्ताओं को साजिश करने वालों से सतर्क रहने की अपील

बसपा प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संगठन के भीतर भ्रम और साजिश की स्थिति पैदा कर पार्टी के अभियान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।

मायावती के अनुसार, बसपा का लक्ष्य पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना है और पार्टी कार्यकर्ताओं को ऐसे तत्वों से सावधान रहना होगा, जो इस अभियान को कमजोर करना चाहते हैं।

2025 में गुटबाजी के आरोप में भी हुई थी कार्रवाई

वर्ष 2025 में मायावती ने अशोक सिद्धार्थ और उनके करीबी नितिन सिंह को गुटबाजी और अनुशासनहीनता के आरोपों में पार्टी से बाहर कर दिया था।

उस समय मायावती ने कहा था कि दक्षिणी राज्यों के प्रभारी रहे डॉ. अशोक सिद्धार्थ और नितिन सिंह को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के भीतर गुटबाजी जारी रही और संगठन के खिलाफ गतिविधियों के आरोप सामने आए।

इसी दौर में आकाश आनंद के खिलाफ भी संगठनात्मक कार्रवाई हुई थी। 2 मार्च को उनका पद वापस लिया गया और 3 मार्च को उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। बाद में माफी मांगने के बाद 13 अप्रैल को उनकी बसपा में वापसी हो गई थी। करीब छह महीने बाद अशोक सिद्धार्थ को भी दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया गया था।

उम्मीदवारों के चयन पर मायावती ने पहले ही किया था रुख साफ

इससे पहले 31 जुलाई को मायावती ने बसपा में उम्मीदवार तय करने के अधिकार को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी में टिकट देने और उम्मीदवारों के नाम तय करने का अधिकार केवल उनके पास है।

उन्होंने यह भी कहा था कि आकाश आनंद या अन्य नेता उनकी अनुमति और निर्देश के आधार पर कार्यकर्ता सम्मेलनों में उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करते हैं।

इसी क्रम में आकाश आनंद के 10 अगस्त को हाथरस पहुंचकर बसपा उम्मीदवार के नाम का ऐलान करने की बात कही गई थी।

आकाश आनंद के दौरे और बैठकों के लिए भी तय किए गए नियम

मायावती ने आकाश आनंद की संगठनात्मक भूमिका को लेकर दो महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट की थीं। आकाश आनंद देश के अलग-अलग राज्यों में बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों का जायजा ले सकते हैं, लेकिन इसकी पूरी जानकारी मायावती तक पहुंचनी चाहिए। संबंधित राज्यों के प्रभारियों को बैठकों और कार्यक्रमों की रिपोर्ट सीधे लखनऊ या दिल्ली भेजनी होगी।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में किसी भी दौरे या कार्यक्रम से पहले आकाश आनंद और पार्टी के कोऑर्डिनेटर्स को मायावती से अनुमति लेना जरूरी होगा।

सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीति में आए थे अशोक सिद्धार्थ

डॉ. अशोक सिद्धार्थ का जन्म 5 जनवरी 1965 को हुआ था। वे पेशे से डॉक्टर हैं और उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज से नेत्र रोग से संबंधित डिप्लोमा किया है।

सरकारी सेवा के दौरान वे बामसेफ से जुड़े रहे और विधानसभा, जिला तथा मंडल अध्यक्ष जैसे पदों पर काम किया। वर्ष 2007 में कन्नौज के गुरसहायगंज स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनाती के दौरान उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दिया और बसपा में शामिल हो गए।

बसपा के टिकट पर वे पहली बार 2009 और दूसरी बार 2016 में एमएलसी बने। इसके बाद वर्ष 2016 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। वे 2022 तक राज्यसभा सदस्य रहे।

पार्टी में वे कानपुर-आगरा जोनल कोऑर्डिनेटर समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। राष्ट्रीय सचिव के अलावा उन्होंने कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल सहित कई राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारी भी संभाली।

उनकी पत्नी सुनीता सिद्धार्थ वर्ष 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। अशोक सिद्धार्थ को पार्टी में लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर संगठनात्मक काम करने वाले नेताओं में गिना जाता रहा है।

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories