The Red Ink
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कई बड़े और गंभीर दावे किए हैं। अपने शहर लौटने के बाद दिपके ने आरोप लगाया कि भाजपा की ओर से उन्हें पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि आंदोलन के दौरान उनके माता-पिता और व्यापारिक सहयोगियों को जान से मारने की धमकियां दी गईं।
दिपके ने भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और दिल्ली पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब यह लड़ाई केवल विरोध प्रदर्शन या राजनीतिक विपक्ष तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और अधिकारों की रक्षा का मुद्दा बन चुकी है।
हालांकि, भाजपा या संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
‘लोकतंत्र पर खतरा, सभी को एकजुट होना होगा’
अभिजीत दिपके ने कहा कि देश में राजनीतिक घटनाक्रमों और सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई को एक साथ देखने की जरूरत है। उन्होंने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में हुए विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अलग-अलग समूहों और लोगों को एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी चाहिए।
दिपके ने कहा, “मुद्दा अब केवल आंदोलन या विपक्ष का नहीं रह गया है। लोकतंत्र खतरे में है। अगर सरकारी जांच एजेंसियों की कार्रवाई और देश में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों को देखा जाए, तो तस्वीर साफ हो जाती है।”
रामदेव के बयान पर पलटवार, बोले— ‘पतंजलि के उत्पादों पर ध्यान दें’
जेन-जी आंदोलन को लेकर बाबा रामदेव की ओर से संस्कृति को धूमिल करने संबंधी टिप्पणी पर भी दिपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी अब देश से जुड़े मुद्दों को समझने और अपनी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम है।
दिपके ने कहा कि बाबा रामदेव को युवाओं की आलोचना करने के बजाय अपने उत्पादों और उनसे जुड़े मामलों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की ओर से पतंजलि को लेकर की गई टिप्पणियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने सवाल किया कि क्या लोकतंत्र और अधिकारों के लिए आवाज उठाना संस्कृति को नुकसान पहुंचाना है? क्या ‘जय भीम’ के नारे लगाना, डॉ. भीमराव आंबेडकर और महात्मा गांधी की तस्वीरों के साथ मार्च करना संस्कृति विरोधी माना जाएगा?
दिपके ने कहा, “अगर इसे संस्कृति को धूमिल करना कहा जाता है, तो फिर हम यह कर रहे हैं।”
कंगना रनौत को जवाब— ‘यही युवा भविष्य के मतदाता हैं’
अभिजीत दिपके ने जेन-जी को लेकर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल 18 से 22 वर्ष के युवा देश के भविष्य के मतदाता हैं और इनमें बड़ी संख्या सामान्य परिवारों के बच्चों की है।
उन्होंने कहा कि इन युवाओं की आलोचना करने से पहले उनके मुद्दों और चिंताओं को समझना जरूरी है। दिपके के अनुसार, यह पीढ़ी केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों पर भी सक्रिय है।
किसान आंदोलन के साथ खड़े रहने का ऐलान
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत से मुलाकात पर दिपके ने कहा कि छात्र और किसान आंदोलन एक-दूसरे के संघर्ष को समझते हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े कई युवा किसान परिवारों से आते हैं, इसलिए किसानों के मुद्दों से उनका स्वाभाविक जुड़ाव है।
दिपके ने कहा कि जब भी जरूरत पड़ेगी, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ किसानों के साथ खड़ी होगी। उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग जन आंदोलनों के बीच एकजुटता जरूरी है।
विदेशी फंडिंग के आरोप पर अमित शाह से सवाल
आंदोलन के दौरान ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को विदेश से फंड मिलने के आरोपों पर दिपके ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया।
उन्होंने कहा कि यदि विदेश से अवैध फंडिंग के आरोप सही हैं, तो इसकी जिम्मेदारी गृह मंत्रालय और संबंधित जांच एजेंसियों की जवाबदेही से भी जुड़ती है। दिपके ने सवाल उठाया कि अगर ऐसी फंडिंग हो रही थी तो उसे रोकने के लिए समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
उन्होंने मौजूदा शिक्षा मंत्री को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की और बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई पर पहले दिए गए बयानों का मुद्दा उठाया।
बिना वर्दी लाठी चलाने के आरोप पर पुलिस को घेरा
जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान कथित तौर पर बिना वर्दी वाले लोगों के छात्रों पर लाठी चलाने के सवाल पर दिपके ने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस को संविधान और कानून के दायरे में काम करना चाहिए। दिपके ने आरोप लगाया कि यदि पुलिस की कार्रवाई को रिकॉर्ड किए जाने का डर है, तो उसे ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जिन पर सवाल खड़े हों।
उन्होंने पुलिस पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए RSS और ‘मैं भी चौकीदार’ को लेकर तीखी टिप्पणी भी की।
‘प्रदर्शन से पहले पहुंचा था पत्थरों से भरा ट्रक’
अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर एक और गंभीर दावा किया। उन्होंने कहा कि 20 तारीख की रात ही प्रदर्शन स्थल के पास पत्थरों से भरा एक ट्रक खड़ा कर दिया गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि वहां एक क्षतिग्रस्त वाहन पहले से मौजूद था।
दिपके के अनुसार, उन्होंने इस जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था और पुलिस अधिकारियों से भी सवाल किया था। उनका दावा है कि पुलिस ने वाहन को लोक निर्माण विभाग से जुड़ा बताया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पहले से आशंका थी कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा की स्थिति पैदा कर उसका आरोप छात्रों पर लगाया जा सकता है। दिपके ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान भी प्रदर्शन को दबाने के लिए इसी तरह के तरीके अपनाने के आरोप लगे थे।
हालांकि, पत्थरों से भरे ट्रक और कथित साजिश से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दिल्ली पुलिस की ओर से भी इन आरोपों पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जंतर-मंतर आंदोलन के बाद तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी
जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं। भाजपा में शामिल होने के प्रस्ताव, परिवार को धमकी, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन स्थल पर कथित साजिश जैसे दिपके के दावों ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
अब इन आरोपों पर भाजपा, दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। साथ ही, दिपके के दावों की जांच या स्वतंत्र पुष्टि होने के बाद ही इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


