प्रयागराज ITI में ‘सॉल्वर गैंग’ का पर्दाफाश: STF ने प्रिंसिपल और अनुदेशकों समेत कई को दबोचा, 5.10 लाख रुपये बरामद

The Red Ink

उत्तर प्रदेश STF ने प्रयागराज के नैनी स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) में परीक्षा पास कराने के कथित खेल का खुलासा किया है। STF के अनुसार, वार्षिक और अखिल भारतीय व्यावसायिक परीक्षा के सैद्धांतिक विषयों की कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में परीक्षार्थियों से पैसे लेकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाए जा रहे थे। इस मामले में संस्थान के प्रिंसिपल, परीक्षा प्रभारी, अनुदेशकों और सॉल्वर समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

परीक्षार्थियों से वसूली गई रकम भी मिली

STF ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से परीक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। इसके अलावा 5 लाख 10 हजार रुपये नकद भी मिले हैं। STF का कहना है कि यह रकम परीक्षार्थियों को परीक्षा में पास कराने के एवज में वसूली गई थी।

संस्थान परिसर से हुई गिरफ्तारी

STF ने सभी आरोपियों को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, नैनी के परिसर में स्थित कौशल विकास भवन से गिरफ्तार किया। कार्रवाई थाना नैनी क्षेत्र में की गई।

इन सॉल्वरों को STF ने पकड़ा

गिरफ्तार आरोपियों में शिवम कुमार पुत्र जटाशंकर बिंद, निवासी बरवॉ शुक्लपुर, थाना मेजा, प्रयागराज शामिल है। STF के मुताबिक वह सॉल्वर के तौर पर काम कर रहा था। इसके अलावा रणविजय सिंह, जय सिंह, जितेंद्र पटेल और दिलीप कुमार पटेल को भी सॉल्वर के रूप में गिरफ्तार किया गया है।

प्रिंसिपल और परीक्षा से जुड़े कर्मचारी भी गिरफ्त में

STF की कार्रवाई में संस्थान के प्रिंसिपल अशोक कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। परीक्षा प्रभारी और कार्यदेशक रविप्रकाश के अलावा अनुदेशक फूल प्रकाश, धीरज कुमार शर्मा, राजेश कुमार और राजकुमार मौर्या को भी पकड़ा गया है।

परीक्षा व्यवस्था में अंदरूनी मिलीभगत की आशंका

STF की कार्रवाई से परीक्षा प्रक्रिया में अंदरूनी मिलीभगत की आशंका गहरा गई है। आरोप है कि संस्थान से जुड़े कुछ लोगों की मदद से परीक्षार्थियों की जगह सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराने का नेटवर्क चलाया जा रहा था। STF अब इस पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

आगे की जांच में खुल सकते हैं और नाम

STF बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए कितने परीक्षार्थियों को परीक्षा पास कराने का भरोसा दिया गया और अब तक कितनी रकम वसूली गई। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

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