The Red Ink
दलीप ट्रॉफी 2026 के लिए ईस्ट ज़ोन की 15 सदस्यीय टीम घोषित कर दी गई है। टीम की कप्तानी विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन को सौंपी गई है, जबकि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को उपकप्तान की जिम्मेदारी दी गई है। वैभव को सीनियर रेड-बॉल टीम का उपकप्तान बनाए जाने के फैसले ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। प्रसिद्ध क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए चयनकर्ताओं की सोच पर सवाल उठाया है।
हर्षा भोगले ने कहा- उपकप्तानी देने के पीछे क्या सोच है?
हर्षा भोगले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि वैभव सूर्यवंशी को एक सीनियर रेड-बॉल टीम का उपकप्तान बनाने के पीछे क्या सोच रही होगी। उन्होंने वैभव के फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए कहा कि युवा बल्लेबाज ने अब तक 12 पारियों में 207 रन बनाए हैं और उनका औसत 17.25 का है। भोगले ने वैभव की प्रतिभा को असाधारण बताया, लेकिन साथ ही कहा कि रेड-बॉल क्रिकेट में खिलाड़ी को सीखने और अनुभव हासिल करने के लिए लंबा समय चाहिए। उनके मुताबिक, वैभव अभी इस प्रारूप में अपने सफर की शुरुआती सीढ़ी पर हैं।
कम उम्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलने से बढ़ी चर्चा
वैभव सूर्यवंशी ने कम समय में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से खास पहचान बनाई है। हाल ही में भारत के इंग्लैंड दौरे के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ टी-20 सीरीज में भी वैभव ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। शानदार खेल के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया। अब दलीप ट्रॉफी में उपकप्तानी मिलने को उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
ईस्ट ज़ोन टीम में अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी
ईस्ट ज़ोन की टीम में कई अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के अलावा अभिमन्यु ईश्वरन, मुकेश कुमार, शाहबाज अहमद और कुमार कुशाग्र भी टीम का हिस्सा हैं। ऐसे अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद वैभव को उपकप्तान बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, यह फैसला यह भी दिखाता है कि चयनकर्ता युवा बल्लेबाज की क्षमता और भविष्य की नेतृत्व भूमिका को लेकर भरोसा जता रहे हैं।
प्रतिभा के साथ अनुभव की जरूरत पर बहस
वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारों में गिना जा रहा है। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनके प्रदर्शन ने उन्हें तेजी से लोकप्रिय बनाया है, लेकिन रेड-बॉल क्रिकेट की चुनौतियां अलग मानी जाती हैं। इस प्रारूप में बल्लेबाज की तकनीक, धैर्य, लंबे समय तक क्रीज पर टिकने की क्षमता और मैच की परिस्थितियों को समझना अहम होता है। हर्षा भोगले की टिप्पणी के बाद अब चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि वैभव को इतनी जल्दी नेतृत्व की जिम्मेदारी देना भविष्य की तैयारी है या फिर उनके मौजूदा रेड-बॉल अनुभव से बड़ा फैसला।
अब दलीप ट्रॉफी में वैभव का प्रदर्शन और उपकप्तान के तौर पर उनकी भूमिका इस फैसले को लेकर चल रही बहस का जवाब दे सकती है।




