The Red Ink
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित डीपफेक वीडियो और भ्रामक पोस्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। गडकरी ने मेटा, एक्स, गूगल और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करते हुए 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। जस्टिस आरिफ डॉक्टर की बेंच ने गडकरी की ओर से पेश वकील संदीप एस. लड्डा को केस से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त के लिए तय कर दी गई।
E20 नीति से गलत तरीके से जोड़ने का आरोप
गडकरी का कहना है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार डीपफेक सामग्री साझा की। इन पोस्ट और वीडियो में उन्हें केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) और E20 ईंधन नीति से सीधे जोड़कर दिखाया गया।
याचिका में सोशल मीडिया पर किए गए 24 ऐसे पोस्ट का जिक्र किया गया है, जिन्हें गडकरी ने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। उन्होंने अदालत से इन पोस्ट को हटाने के निर्देश देने की मांग की है।
E20 क्या है और इसे कब लागू किया गया?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और चावल जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। भारत में E20 ईंधन की शुरुआत अप्रैल 2023 में चुनिंदा पेट्रोल पंपों से हुई थी। इसके बाद अप्रैल 2025 में इसे देशभर में लागू किया गया। इससे पहले अधिकांश वाहनों में E10 पेट्रोल का इस्तेमाल होता था, जिसमें एथेनॉल की मात्रा 10 प्रतिशत थी।
सोशल मीडिया पर गडकरी को क्यों बनाया गया निशाना?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर नितिन गडकरी को लेकर मीम्स और पोस्ट तेजी से वायरल होने लगे। कई पोस्ट में उन्हें E20 ईंधन से जुड़े विवाद का जिम्मेदार बताया गया। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने यह आरोप भी लगाया कि एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के पीछे गडकरी का निजी हित हो सकता है, क्योंकि उनके परिवार का संबंध गन्ना आधारित कंपनियों से बताया जाता है। हालांकि, गडकरी इन आरोपों को पहले भी खारिज कर चुके हैं।
गडकरी ने आरोपों को बताया था दुष्प्रचार
पिछले साल एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने कहा था कि उनके खिलाफ एथेनॉल नीति को लेकर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया था कि कुछ लोगों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके खिलाफ पोस्ट करने के लिए प्रेरित किया जा रहा था और इसके पीछे राजनीतिक साजिश भी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत में एथेनॉल मिश्रण की शुरुआत 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में हुई थी। ऐसे में E20 नीति को केवल उनसे जोड़ना सही नहीं है।
परिवार की कंपनियों से जुड़े आरोपों पर क्या बोले थे गडकरी?
गडकरी ने पहले कहा था कि उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और उन्हें कई बार इन्हें बंद करने की सलाह भी दी गई। उन्होंने दावा किया था कि इन कंपनियों का एथेनॉल उत्पादन बहुत सीमित है और इसे देश की एथेनॉल नीति से जोड़ना भ्रामक है। उनका कहना था कि यदि वे इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन या फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे इन वाहनों का निर्माण भी करते हैं।
एथेनॉल को बढ़ावा देने के पीछे क्या है सरकार का तर्क?
नितिन गडकरी लंबे समय से वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की वकालत करते रहे हैं। उनका कहना है कि एथेनॉल मिश्रण से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, प्रदूषण में कमी आ सकती है और किसानों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। गडकरी के मुताबिक, जैव ईंधन को बढ़ावा देना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम है।
अब 5 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
फिलहाल, बॉम्बे हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी। अदालत के सामने अब यह सवाल रहेगा कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री को लेकर संबंधित प्लेटफॉर्म और अन्य पक्षों की क्या जिम्मेदारी बनती है और क्या इन पोस्ट से गडकरी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।




