The Red Ink:
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन के रवैये पर तीखी नाराजगी जताई है। 81 दिन की ‘गविष्ठि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा’ पूरी करने के बाद लखनऊ पहुंचे शंकराचार्य ने कहा कि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी करने के बावजूद उनके कार्यक्रम को मंजूरी नहीं मिली। इसी वजह से अब 24 जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम डिजिटल माध्यम से आयोजित किया जाएगा।
‘अगली बार अनुमति का इंतजार नहीं करेंगे’
दैनिक भास्कर से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि कार्यक्रम के लिए महीनों पहले आवेदन किया गया, मैदान बुक कराया गया और करीब 4.64 लाख रुपये का शुल्क भी जमा किया गया था। इसके बावजूद प्रशासन ने अंतिम समय तक स्पष्ट अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे लखनऊ आने के लिए किसी अनुमति का इंतजार नहीं करेंगे।
‘गौ रक्षा आंदोलन को रोकने की कोशिश हुई’
शंकराचार्य का आरोप है कि यदि प्रशासन चाहता तो समय रहते अनुमति दी जा सकती थी। उनका कहना है कि आखिरी वक्त तक स्थिति स्पष्ट न करना इस बात का संकेत है कि गौ रक्षा से जुड़े इस अभियान को कमजोर करने की कोशिश की गई। हालांकि उन्होंने कहा कि इससे आंदोलन की दिशा नहीं बदलेगी।
403 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी यात्रा
शंकराचार्य के मुताबिक, 3 मई 2026 को गोरखपुर से शुरू हुई ‘गविष्ठि यात्रा’ 81 दिनों में उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों तक पहुंची। इस दौरान लाखों लोगों से संवाद किया गया और गौमाता को केवल पशु नहीं, बल्कि ‘माता’ का दर्जा देने की मांग के समर्थन में जनसंपर्क अभियान चलाया गया।
‘कई जगह सड़क पर रात गुजारनी पड़ी’
यात्रा के दौरान प्रशासनिक बाधाओं का जिक्र करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कई स्थानों पर उन्हें रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं मिली। उनके मुताबिक, ऐसी परिस्थितियां भी आईं जब उन्हें सड़क पर रात बितानी पड़ी। इसके बावजूद यात्रा बिना रुके पूरी की गई।
वोट को लेकर भी की अपील
शंकराचार्य ने दावा किया कि यात्रा के दौरान करीब 18 लाख लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे ऐसे उम्मीदवारों का समर्थन नहीं करेंगे, जो गौमाता को केवल पशु मानते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अभी भी निर्णय लेने का अवसर है, अन्यथा जनता चुनाव में अपना फैसला खुद करेगी।
राम मंदिर ट्रस्ट और शंकराचार्य विवाद पर भी बोले
राम मंदिर ट्रस्ट को भेजे गए नोटिस पर भी उन्होंने अपनी बात रखी। शंकराचार्य ने कहा कि ट्रस्ट से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को किस आधार पर शंकराचार्य कहा गया। उनके अनुसार, यह धार्मिक परंपरा के साथ-साथ संस्थागत जवाबदेही का भी विषय है।
‘यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा’
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि 24 जुलाई को दोपहर 12 से 2 बजे के बीच ‘गौ गर्जना अक्षौहिणी संकल्प’ डिजिटल माध्यम से आयोजित होगा। इसी कार्यक्रम में आगे की रणनीति और आगामी आंदोलन की रूपरेखा का ऐलान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशव्यापी स्वरूप लेगा।




