The Red Ink
पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में इस वक्त एक नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है—तृणमूल कांग्रेस की युवा सांसद Sayani Ghosh। मंच पर कभी शायरी, कभी गीत और कभी तीखे राजनीतिक हमलों के जरिए वह पार्टी की स्टार प्रचारक बनकर उभरी हैं।
एक्ट्रेस से राजनीति तक का सफर
साल 2021 में Mamata Banerjee की पार्टी टीएमसी में शामिल होने से पहले ही सयानी घोष बंगाली फिल्म और टीवी इंडस्ट्री का जाना-पहचाना चेहरा थीं। कोलकाता के साउथ पॉइंट स्कूल और University of Calcutta से पढ़ाई के बाद उन्होंने अभिनय और एंकरिंग में पहचान बनाई। कैमरे के सामने बोलने का यही आत्मविश्वास आगे चलकर उनकी राजनीतिक ताकत बन गया।
चुनावी मंच पर अलग अंदाज़
राजनीति में आने के बाद सयानी ने अपने भाषणों को सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा। वह मंच से गाना गाती हैं, शायरी सुनाती हैं और भीड़ से सीधे कनेक्ट करती हैं। यही वजह है कि उनकी रैलियों में भीड़ खिंच रही है और सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल हो रहे हैं।
विवादों से भी जुड़ा रहा नाम
राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा। त्रिपुरा में ‘खेला होबे’ नारे को लेकर गिरफ्तारी से लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ तक, सयानी कई बार विवादों में रहीं। हालांकि हर बार उन्होंने खुद को राजनीतिक तौर पर और मजबूत ही किया।
संसद में आक्रामक और चुटीला अंदाज़
लोकसभा पहुंचने के बाद उनके भाषणों ने उन्हें नई पहचान दी। वह बंगाली, हिंदी और अंग्रेज़ी तीनों भाषाओं में धाराप्रवाह बोलती हैं और अपने संबोधन में संविधान, बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दों को आक्रामक अंदाज़ में उठाती हैं। उनके भाषण अक्सर सोशल मीडिया पर ट्रेंड करते हैं।
धर्मनिरपेक्ष छवि पर जोर
सयानी घोष अपने भाषणों में सभी धर्मों को साथ लेकर चलने की बात करती हैं। कभी मंच से धार्मिक गीत गाकर तो कभी अलग-अलग धर्मों के संदर्भ देकर वह खुद को एक सेक्युलर चेहरा साबित करने की कोशिश करती हैं। इसी वजह से उन्हें समर्थन के साथ आलोचना भी झेलनी पड़ती है।
ममता बनर्जी की करीबी
टीएमसी के अंदर सयानी को Mamata Banerjee और Abhishek Banerjee के करीबी नेताओं में गिना जाता है। उनके भाषणों में ‘दीदी’ का जिक्र अक्सर होता है और वह खुद को ममता बनर्जी की विचारधारा का विस्तार बताती हैं।
भविष्य की राजनीति में क्या होगा रोल?
टीएमसी में सयानी घोष का उभार पार्टी की बदलती रणनीति को भी दिखाता है, जहां अब सेलिब्रिटी चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है। हालांकि उनका जमीनी नेटवर्क अभी उतना मजबूत नहीं माना जाता, लेकिन उनकी लोकप्रियता उन्हें आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा बना सकती है।




