लखनऊ में स्वामी प्रसाद मौर्य का हमला: बोले- यूपी में जाति देखकर होती है कार्रवाई, ‘जंगलराज’ जैसे हालात

The Red Ink: अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप; कानून व्यवस्था और भेदभाव को लेकर उठाए सवाल…

सरकार पर पक्षपात के आरोप, जाति को लेकर सवाल
Swami Prasad Maurya ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून का इस्तेमाल निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रहा, बल्कि जाति और राजनीतिक जुड़ाव के आधार पर कार्रवाई तय की जा रही है। मौर्य के मुताबिक, यदि आरोपी SC/ST, OBC या अल्पसंख्यक वर्ग से होता है तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाते हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल या प्रभावशाली वर्ग से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश होती है।

‘जंगलराज’ जैसे हालात का आरोप
मौर्य ने कहा कि इसी कथित भेदभाव की वजह से प्रदेश में कानून-व्यवस्था कमजोर होती जा रही है और हालात ‘जंगलराज’ जैसे नजर आते हैं। उन्होंने दावा किया कि अपराधियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई न होने से उनके हौसले बढ़ रहे हैं।

घटनाओं का हवाला देकर उठाए सवाल
उन्होंने कुछ आपराधिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कई मामलों में पीड़ितों की शिकायतों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की गई। मौर्य का कहना था कि यदि पुलिस और प्रशासन समय रहते सख्ती दिखाते, तो गंभीर अपराधों को रोका जा सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में दबाव बनने के बाद ही कार्रवाई होती है, जबकि मुख्य आरोपी लंबे समय तक फरार रहते हैं।

राजनीतिक आधार पर कार्रवाई का भी आरोप
मौर्य ने यह भी कहा कि कार्रवाई कई बार राजनीतिक जुड़ाव को देखकर होती है। उनका दावा था कि विपक्ष से जुड़े नेताओं पर एजेंसियों की कार्रवाई तेजी से होती है, जबकि सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के मामलों में ढील दिखाई देती है।

महिला और सामाजिक मुद्दों पर भी टिप्पणी
महिलाओं से जुड़े एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मौर्य ने कहा कि ऐसी सोच लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सम्मान के साथ अपने फैसले लेने का अधिकार है।

2027 चुनाव को लेकर रणनीति साफ
आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर मौर्य ने कहा कि उनकी पार्टी कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों को लेकर मैदान में उतरेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में युवा, किसान और कमजोर वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, जिसे चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा।

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