इस्लामाबाद में सजी बातचीत की मेज, लेकिन आमने-सामने नहीं आएंगे ईरान-अमेरिका; युद्धविराम के बीच गहराया संशय

The Red Ink: पांच हफ्ते की जंग और उसके बाद बढ़ाए गए युद्धविराम के बीच कूटनीति फिर एक्टिव हुई है। लेकिन इस्लामाबाद में हलचल के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच भरोसे की खाई अब भी भरी नहीं है—बातचीत की कोशिश है लेकिन सीधी मुलाकात पर सस्पेंस कायम है।

इस्लामाबाद में हलचल, लेकिन दूरी बरकरार
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बार फिर ग्लोबल पावर गेम का केंद्र बन गई है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां पहुंच चुके हैं। वहीं अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और Jared Kushner के यहां आने की तैयारी है लेकिन सबसे बड़ा ट्विस्ट यही है दोनों पक्ष एक ही शहर में होंगे, फिर भी आमने-सामने बैठने की कोई योजना नहीं है।

ईरान का साफ संदेश—‘सीधी बातचीत नहीं’
ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इस दौरे का मकसद अमेरिका से वार्ता नहीं, बल्कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय रिश्तों और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा है। प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने दो टूक कहा—ईरान अपने विचार पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाएगा। यानी कूटनीति अब सीधे संवाद से हटकर ‘मध्यस्थ मॉडल’ पर टिक गई है, जो अविश्वास की गहराई दिखाता है।

पहले दौर की नाकामी की परछाईं
11-12 अप्रैल को इसी इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता में पहली बातचीत हुई थी, लेकिन वह बेनतीजा रही। उस वक्त अमेरिका की तरफ से नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance कर रहे थे। अब दूसरी कोशिश हो रही है, लेकिन इस बार अमेरिका भी फुल-स्केल राजनीतिक जोखिम लेने से बचता नजर आ रहा है।

अमेरिका का दबाव—‘समझौता करो, वरना…’
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने साफ कहा है कि ईरान के पास “एक अच्छा समझौता” करने का मौका है—शर्त सिर्फ एक है, परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ना होगा। इसके साथ ही होर्मुज़ स्ट्रेट में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी बढ़ने की बात भी कही गई है—जो आने वाले खतरे का संकेत है।

जंग, युद्धविराम और बढ़ता तनाव
अमेरिका और इसराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए थे, जिसके बाद हालात तेजी से बिगड़े। करीब पांच हफ्ते तक चली इस जंग के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ, जिसे बाद में Donald Trump ने बढ़ा दिया। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार युद्धविराम उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं—यानी शांति सिर्फ कागजों में है।

होर्मुज़ स्ट्रेट—दुनिया की सांस अटकी हुई
तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है होर्मुज़ स्ट्रेट—जहां से दुनिया का करीब 20% तेल और LNG सप्लाई गुजरती है। ईरान की ओर से जहाजों पर पाबंदियों और अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

कूटनीति या रणनीतिक खेल?
व्हाइट हाउस का कहना है कि अमेरिका फिलहाल “ईरान की बात सुनना” चाहता है और कूटनीति को मौका देने के लिए तैयार है। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है सीधी बातचीत नहीं हो रही, भरोसा नहीं बन रहा, और शर्तें पहले से ज्यादा सख्त हो चुकी हैं। इस्लामाबाद में बातचीत की हलचल भले ही उम्मीद जगाती दिखे, लेकिन असल तस्वीर अभी भी धुंधली है क्योंकि जब दो देश एक ही शहर में होकर भी आमने-सामने बैठने से बचें, तो समझ लेना चाहिए मुद्दा बातचीत का नहीं, भरोसे का है।

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