लेंसकार्ट ड्रेस कोड विवाद भड़का: तिलक-हिजाब बहस पर सड़कों पर विरोध, धीरेंद्र शास्त्री का तीखा बयान

The Red Ink
आईवियर कंपनी Lenskart इन दिनों अपने कथित ड्रेस कोड को लेकर विवादों में घिर गई है। सोशल मीडिया पर एक ‘ग्रूमिंग गाइड’ वायरल होने के बाद मामला इतना बढ़ा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

चार दिन से चल रहा विरोध, स्टोर्स पर पहुंच रहे संगठन
हिंदू संगठनों से जुड़े लोग लगातार कई शहरों में कंपनी के शोरूम पहुंचकर कर्मचारियों को तिलक लगा रहे हैं और कलावा बांध रहे हैं। उनका आरोप है कि कंपनी की नीति धार्मिक प्रतीकों के साथ भेदभाव करती है।

धीरेंद्र शास्त्री का बयान, विवाद और तेज
इस पूरे मामले में Dhirendra Shastri ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कंपनी के प्रमोटर्स पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर ऐसी नीति रखनी है तो कंपनी भारत में नहीं, कहीं और जाकर कारोबार करे। उनके इस बयान के बाद विवाद और उग्र हो गया।

भोपाल से रायपुर तक प्रदर्शन की तस्वीरें
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट स्थित स्टोर पर हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और कर्मचारियों को तिलक लगाया। रायपुर में भी एक धार्मिक संगठन के लोग शोरूम पहुंचे, कर्मचारियों से उनकी पहचान पूछी और उन्हें तिलक लगाकर काम करने को कहा। गाजियाबाद में भाजपा विधायक Nandkishor Gurjar ने स्टोर पहुंचकर ड्रेस कोड का विरोध किया और कंपनी के मालिकों पर सवाल उठाए। मुंबई के अंधेरी में भाजपा नेता Nazia Elahi Khan ने स्टोर के अंदर जाकर हंगामा किया और ड्रेस पॉलिसी को लेकर मैनेजर से बहस की।

क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब एक्टिविस्ट Shefali Vaidya ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक डॉक्यूमेंट शेयर किया। इसमें दावा किया गया कि कंपनी कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोकती है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है।

कंपनी का जवाब—‘पुराना डॉक्यूमेंट, गलत समझा गया’
विवाद बढ़ने पर कंपनी के फाउंडर Peyush Bansal ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और कंपनी की मौजूदा नीति को नहीं दर्शाता। साथ ही दावा किया कि कंपनी सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान करती है और कर्मचारी अपनी आस्था के प्रतीकों के साथ काम करते हैं।

वायरल गाइड में क्या लिखा था?
सोशल मीडिया पर सामने आए दस्तावेज में महिला कर्मचारियों के लिए बिंदी और क्लचर पर रोक का जिक्र था। साथ ही धार्मिक धागे या रिस्टबैंड हटाने की बात कही गई थी। वहीं हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति दी गई थी, लेकिन रंग और डिजाइन को लेकर कुछ शर्तें रखी गई थीं।

कंपनी का दायरा और पहचान
2010 में Peyush Bansal, अमित चौधरी और सुमित कपाही द्वारा शुरू की गई Lenskart आज देश की सबसे बड़ी आईवियर रिटेल कंपनियों में शामिल है। इसके भारत में 2500 से ज्यादा स्टोर हैं और कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब ₹94 हजार करोड़ बताई जाती है।

विवाद क्यों बढ़ा?
यह मामला सिर्फ ड्रेस कोड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक पहचान और समानता के मुद्दे से जुड़ गया। एक तरफ संगठन इसे आस्था से जुड़ा मामला बता रहे हैं, वहीं कंपनी इसे गलतफहमी कह रही है। फिलहाल यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और राजनीतिक रंग ले सकता है।

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