पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर गूंजे फाइटर जेट: सुलतानपुर एयरस्ट्रिप पर सुखोई-मिराज की धमक, आज बड़ा एयरफोर्स ड्रिल

The Red Ink
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की हवाई पट्टी एक बार फिर भारतीय वायुसेना की ताकत का मंच बन चुकी है। मंगलवार दोपहर सुलतानपुर जिले में स्थित एयरस्ट्रिप पर अचानक आसमान में गूंजती लड़ाकू विमानों की आवाज ने लोगों का ध्यान खींच लिया। यह गर्जना दरअसल बुधवार को होने वाले बड़े युद्धाभ्यास की तैयारी का हिस्सा थी।

रिहर्सल में उतरे 8 फाइटर जेट
यूपीडा के परियोजना प्रबंधक इमरान के मुताबिक, अरवल कीरी करवत गांव के पास बनी हवाई पट्टी पर मंगलवार को करीब डेढ़ बजे 8 लड़ाकू विमान पूर्वाभ्यास के लिए उतरे। इन विमानों ने कई बार टेकऑफ और लैंडिंग कर अभ्यास को अंतिम रूप दिया।

आज दो चरणों में होगा मेगा अभ्यास
22 अप्रैल को होने वाला मुख्य कार्यक्रम दो हिस्सों में आयोजित किया जाएगा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक और फिर शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक। इस दौरान भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान अलग-अलग करतब दिखाएंगे।

सुखोई से तेजस तक दिखेगी ताकत
इस युद्धाभ्यास में सुखोई, मिराज, तेजस और जगुआर जैसे फाइटर जेट शामिल होंगे, जो हवाई पट्टी पर लैंडिंग-टेकऑफ के साथ अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।

प्रशासन ने कसी सुरक्षा, अधिकारी पहुंचे मौके पर
तैयारियों का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह और पुलिस अधीक्षक चारू निगम भी एयरस्ट्रिप पहुंचे। पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और आसपास पुलिस बल तैनात है।

लोगों में दिखा उत्साह, दी गई दूरी बनाए रखने की सलाह
ग्रामीणों और आसपास के लोगों के लिए यह नजारा किसी एयर शो से कम नहीं रहा। बड़ी संख्या में लोग फाइटर जेट्स की झलक पाने के लिए पहुंचे। हालांकि पुलिस ने सभी को हवाई पट्टी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की हिदायत दी है।

एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक डायवर्ट
हवाई पट्टी के परीक्षण और सुरक्षा कारणों से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर वाहनों के रूट में बदलाव किया गया है। 1 मई तक यातायात प्रभावित रहेगा, जबकि 2 मई से सामान्य आवाजाही फिर शुरू होगी।

पहले भी बन चुका है एयरफोर्स का रनवे
यह पहला मौका नहीं है जब इस एक्सप्रेस-वे का इस्तेमाल वायुसेना ने किया हो। इससे पहले 16 नवंबर 2021 को उद्घाटन के दौरान भी यहां एयरफोर्स का अभ्यास हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर आया हरक्युलिस विमान भी इसी पट्टी पर उतरा था।

रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों मायने
प्रशासन के मुताबिक यह कार्यक्रम केवल सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का भी बड़ा संकेत है।

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