The Red Ink
राजधानी लखनऊ में सियासत अब सड़क से निकलकर सीधे घरों तक पहुंचती दिख रही है। बुधवार सुबह समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता गौरव चौधरी अपने समर्थकों के साथ मेयर सुषमा खर्कवाल के आवास पर पहुंच गए और जमकर हंगामा किया।
नेम प्लेट पर चप्पल, बाहर जोरदार बवाल
गौरव चौधरी ने मेयर के आवास के बाहर लगे नेम प्लेट पर चप्पलों से प्रहार किया और उस पर कालिख भी पोती। इतना ही नहीं, सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरियरों को झकझोरते हुए “सुषमा खर्कवाल मुर्दाबाद” के नारे लगाए गए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी शेयर किया गया, जो तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में पहचान भी बताई गई
वायरल वीडियो में गौरव चौधरी के नाम के साथ “विधानसभा 43 सिवालखास, मेरठ” लिखा हुआ नजर आ रहा है, जिससे उनकी राजनीतिक पहचान भी सामने आई है।
मेयर का पलटवार- ‘यही है सपा का चरित्र’
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मेयर सुषमा खर्कवाल ने सपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सपा का असली चरित्र है, जहां अपनी ही मां-बहन के सम्मान की परवाह नहीं की जाती। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे हमेशा विदेश में रहते हैं।
यहीं से भड़की थी चिंगारी
दरअसल, मंगलवार को महिला आरक्षण के मुद्दे पर निकली जनाक्रोश रैली में मेयर सुषमा खर्कवाल ने मंच से राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि देश में नारी का हमेशा सम्मान हुआ है लेकिन विपक्ष ने महिलाओं का अपमान किया है। अपने भाषण में उन्होंने ‘मां, बहन और बेटी’ के सम्मान का जिक्र करते हुए विपक्षी नेताओं पर सवाल उठाए थे।
मेयर का बचाव- ‘गाली नहीं दी’
विवाद बढ़ने पर मेयर ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी की मां के खिलाफ अपमानजनक शब्द नहीं कहे। उन्होंने चुनौती दी कि अगर किसी के पास ऐसा कोई सबूत है तो सामने लाया जाए। साथ ही उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया।
अखिलेश का जवाब भी आया था
इसी बयान के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर खुला पत्र लिखकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक वजहों से उनकी दिवंगत मां का जिक्र करना एक महिला द्वारा दूसरी महिला का अपमान है और यह भारतीय सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है।
सियासत अब व्यक्तिगत हमलों तक
महिला आरक्षण से शुरू हुआ विवाद अब निजी आरोप-प्रत्यारोप और सड़कों पर प्रदर्शन तक पहुंच गया है। लखनऊ की यह घटना साफ संकेत दे रही है कि राजनीतिक बयानबाजी अब और ज्यादा आक्रामक होती जा रही है- जहां शब्दों की लड़ाई अब सीधे टकराव में बदलती दिख रही है।




