The Red Ink
Narendra Modi अगले हफ्ते दो दिन के उत्तर प्रदेश दौरे पर रहेंगे, जिसमें उनका फोकस अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी रहेगा। इस दौरान 28 अप्रैल को वे एक बड़े महिला सम्मेलन को संबोधित करेंगे। यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाया है और इसे लेकर सियासत तेज है।
काशी में हाई अलर्ट मोड में बीजेपी
Bharatiya Janata Party ने पीएम के दौरे को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। रविवार को काशी यूनिट की बैठक में कार्यक्रम की समीक्षा की गई और जिम्मेदारियां तय की गईं। महिला सम्मेलन के आयोजन की कमान भाजपा महिला मोर्चा को सौंपी गई है, जिसमें 50 हजार से ज्यादा महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
28 अप्रैल: महिला सम्मेलन बनेगा सियासी मंच
पीएम मोदी 28 अप्रैल को वाराणसी में इस बड़े सम्मेलन को संबोधित करेंगे। बताया जा रहा है कि यह कार्यक्रम महिला आरक्षण में “रुकावट” के मुद्दे को लेकर आयोजित किया जा रहा है। इसका सीधा राजनीतिक संदेश विपक्ष की ओर जाएगा, खासकर उस समय जब संसद में बिल पास नहीं हो सका।
बिल क्यों अटक गया? आंकड़ों से समझिए
सरकार ने 2029 से महिलाओं को आरक्षण देने के लिए विशेष सत्र में तीन विधेयक पेश किए थे, जिनमें एक संविधान संशोधन बिल भी शामिल था। वोटिंग के दौरान 528 सांसदों ने हिस्सा लिया-
पक्ष में: 298 वोट
विपक्ष में: 230 वोट
बिल को पास कराने के लिए 352 वोट जरूरी थे, यानी यह 54 वोटों से पीछे रह गया।
पास होता तो क्या बदलता?
अगर यह बिल पारित हो जाता, तो 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को 33% आरक्षण मिल जाता। साथ ही परिसीमन पर लगी रोक हटती और लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जा सकती थी। गौरतलब है कि सितंबर 2023 में Nari Shakti Vandan Adhiniyam पारित किया गया था, जिसका उद्देश्य महिलाओं को 33% राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है।




