महिला आरक्षण बिल पर संसद में ‘महाबहस’ शुरू: 18 घंटे की चर्चा, 2029 से लागू करने की तैयारी, सीटें 850 तक बढ़ाने का प्रस्ताव

The Red Ink
महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर संसद का विशेष सत्र शुरू होते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 16 से 18 अप्रैल तक बुलाए गए इस सत्र में सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। लोकसभा में इस बिल पर 16 और 17 अप्रैल को कुल 18 घंटे चर्चा तय की गई है, जबकि 18 अप्रैल को राज्यसभा में 10 घंटे की बहस और इसके बाद वोटिंग होगी।

लोकसभा में 18 घंटे की बहस, पीएम मोदी रखेंगे पक्ष
जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर सरकार का पक्ष विस्तार से रखेंगे। वहीं, चर्चा का जवाब गृह मंत्री अमित शाह देंगे। इस बहस के बाद सदन में वोटिंग कराई जाएगी, जो इस बिल के भविष्य को तय करेगी।

तीन बड़े विधेयकों पर टकराव
संसद में सिर्फ महिला आरक्षण ही नहीं, बल्कि तीन अहम विधेयकों को लेकर भी सियासी टकराव देखने को मिला। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करने का प्रस्ताव रखा। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। इन तीनों विधेयकों का कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने विरोध किया, जिस पर अमित शाह ने आपत्ति जताते हुए कहा कि विरोध केवल तकनीकी आधार पर ही किया जा सकता है, न कि विधेयकों की मूल भावना पर।

विपक्ष ने उठाए सवाल, अखिलेश ने जनगणना पर घेरा
महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर जल्दबाजी कर रही है। उन्होंने मांग की कि पहले जनगणना कराई जाए, उसके बाद आरक्षण लागू किया जाए। वहीं, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने तीनों विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि ये संविधान की मूल संरचना को प्रभावित करने की कोशिश हैं।

लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 850 करने का प्रस्ताव
इस संशोधन के तहत लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जाएंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव भी शामिल है। नए परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।

परिसीमन आयोग करेगा नई सीमाओं का निर्धारण
बिल के पारित होने के बाद एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। यह आयोग लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का पुनर्निर्धारण करेगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। रिपोर्ट पर जनता से सुझाव भी लिए जाएंगे, जिसके बाद इसे लागू किया जाएगा।

2029 से लागू होगा महिला आरक्षण
महिला आरक्षण कानून, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा जाता है, पहले ही सितंबर 2023 में पारित हो चुका है। अब सरकार इसे संशोधित कर 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की तैयारी में है। इस कानून के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में महिलाओं को एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। यह आरक्षण 15 वर्षों तक लागू रहेगा- यानि 2029, 2034 और 2039 के चुनावों तक। हर चुनाव में आरक्षित सीटें बदली जाएंगी ताकि अलग-अलग क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिल सके। साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी इसमें आरक्षण शामिल रहेगा।

महिला आरक्षण बिल पर संसद में शुरू हुई यह बहस सिर्फ एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले चुनावी गणित, सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक समीकरणों को भी गहराई से प्रभावित करने वाली है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लंबी बहस के बाद यह बिल किस रूप में पारित होता है।

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