संसद में ‘नारी शक्ति’ पर सियासी झटका: 20 घंटे की बहस के बाद 54 वोट से गिरा बिल

The Red Ink
लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर जिस बिल को लेकर सरकार ने ज़ोरदार सियासी दांव खेला था, वही आख़िरी वक्त में आंकड़ों के गणित में उलझकर धराशायी हो गया। दो दिनों तक चली लंबी बहस, अपीलों और आरोप-प्रत्यारोप के बाद भी 131वां संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका और 54 वोट से गिर गया।

बहस लंबी, नतीजा उल्टा
संसद में इस बिल पर चर्चा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। पहले दिन सुबह से देर रात तक करीब 14 घंटे बहस चली, और दूसरे दिन भी कई घंटे चर्चा जारी रही लेकिन जब बारी आई वोटिंग की, तो पूरा समीकरण बदल गया।

वोटिंग में कहां चूकी सरकार?
इस विधेयक को पारित कराने के लिए 352 वोटों की ज़रूरत थी लेकिन समर्थन में सिर्फ 298 सांसद ही खड़े हो सके। विरोध में 230 वोट पड़े और यहीं पर बिल का रास्ता रुक गया। कुल 528 वोट पड़े लेकिन जरूरी आंकड़ा छूने से पहले ही सरकार 54 वोट पीछे रह गई।

एक बिल गिरा, बाकी भी रुके
यह सिर्फ एक विधेयक नहीं था- महिला आरक्षण से जुड़े तीन बड़े प्रस्तावों का पूरा पैकेज था लेकिन जैसे ही मुख्य संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो पाया, सरकार ने बाकी दो बिलों को भी आगे बढ़ाने से रोक दिया।

PM की अपील भी बेअसर
वोटिंग से ठीक पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सांसदों से ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर वोट देने की अपील की थी। उन्होंने विपक्ष को सहयोग के बदले “क्रेडिट” देने की भी बात कही थी लेकिन राजनीतिक खींचतान इतनी गहरी थी कि यह अपील भी असर नहीं डाल सकी।

गृह मंत्री ने विपक्ष को घेरा
गृह मंत्री Amit Shah ने साफ तौर पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को बिल गिरने का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इस पर जश्न मनाना गलत है।

विपक्ष का स्टैंड: समर्थन, लेकिन शर्तों के साथ
विपक्षी दलों ने एक बात बार-बार दोहराई- वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन परिसीमन के मौजूदा प्रस्ताव को लेकर गंभीर आपत्ति है। यही मुद्दा अंत में निर्णायक साबित हुआ और समर्थन का संतुलन टूट गया।

स्पेशल सेशन पर भी विवाद
सरकार ने बजट सत्र खत्म होने के बावजूद 16 से 18 अप्रैल तक विशेष सत्र बुलाया था। विपक्ष चाहता था कि पहले चुनाव खत्म हों और फिर सर्वदलीय बैठक के बाद चर्चा हो, लेकिन यह मांग नहीं मानी गई।

सियासत का असली संदेश
यह सिर्फ एक बिल के गिरने की कहानी नहीं है यह उस टकराव की तस्वीर है, जहां मुद्दे पर सहमति थी लेकिन तरीके पर असहमति ने सब कुछ रोक दिया।

Hot this week

ममता के सबसे भरोसेमंद साथी फिरहाद हकीम का इस्तीफा, TMC संकट और गहराया

The Red Ink पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस...

Topics

ममता के सबसे भरोसेमंद साथी फिरहाद हकीम का इस्तीफा, TMC संकट और गहराया

The Red Ink पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस...

Related Articles

Popular Categories